Monday, 28 Sep 2026

Gen-Z को गंभीरता से सुने, समझें : भागवत

मुंबई (07 अगस्त 26)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा है कि भारत की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता है और नई पीढ़ी जिन मुद्दों को उठा रही है, उन्हें गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने लोकतंत्र में विरोध और आंदोलन को संवाद की प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए कहा कि जब बातचीत से समाधान नहीं निकलता, तब आंदोलन भी अपनी बात रखने का एक वैध माध्यम बन सकता है।

मुंबई में आयोजित 'Gen-Z से संवाद' कार्यक्रम में भागवत ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अलग-अलग विचारों का सामने आना स्वाभाविक है। चर्चा, संवाद और विचार-विमर्श के माध्यम से ही व्यापक सहमति बनती है। यदि किसी कारण से लोगों की बात नहीं सुनी जाती, तो शांतिपूर्ण और रचनात्मक आंदोलन भी उसी संवाद प्रक्रिया का हिस्सा माना जा सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी आंदोलन का उद्देश्य समाज को बांटना नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार लाना होना चाहिए।

भागवत ने कहा कि नई पीढ़ी, विशेषकर Gen-Z, जिन मुद्दों को लेकर अपनी आवाज उठा रही है, उनमें कई शिकायतें वास्तविक हैं। उनके अनुसार, शिक्षा व्यवस्था में अभी भी कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां सुधार की जरूरत है और इसी कारण युवा इन विषयों पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले की पीढ़ियां अक्सर बड़ों की बात बिना सवाल किए स्वीकार कर लेती थीं, लेकिन आज की युवा पीढ़ी हर बात का तार्किक उत्तर चाहती है। इसे नकारात्मक रूप से देखने के बजाय लोकतांत्रिक संस्कृति का हिस्सा माना जाना चाहिए। उन्होंने भारतीय परंपरा के 'शास्त्रार्थ' का उल्लेख करते हुए कहा कि विचारों का आदान-प्रदान ही सही निष्कर्ष तक पहुंचने का रास्ता है।

RSS प्रमुख ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन उसके भी कुछ स्थापित तरीके और संवैधानिक मर्यादाएं हैं। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं ने भी इस दिशा में स्पष्ट संकेत दिए हैं और विरोध उसी भावना के अनुरूप होना चाहिए। उनके अनुसार, युवाओं का आंदोलन किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि व्यवस्था की कमियों को दूर करने के उद्देश्य से होना चाहिए। यदि आंदोलन समाज और व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में हो, तो वह लोकतंत्र को मजबूत करता है। छात्र आंदोलनों और प्रदर्शनकारियों को 'देश-विरोधी' कहे जाने के सवाल पर मोहन भागवत ने कहा कि केवल विरोध करने के आधार पर नई पीढ़ी को इस तरह की संज्ञा देना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि Gen-Z देश की अपनी अगली पीढ़ी है और उसकी मंशा को संदेह की नजर से नहीं देखा जाना चाहिए।

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