नईदिल्ली (26 अगस्त 26)। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव का नया मोर्चा खोल दिया है और इसका असर अब भारत तक पहुंचने की आशंका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने ईरान की अर्थव्यवस्था को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने के लिए प्रतिबंधों का नया और व्यापक अभियान शुरू किया है।ट्रंप प्रशासन ने करीब 60 लोगों, कंपनियों और जहाजों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं और ईरान से कारोबार करने वाले विदेशी संस्थानों को भी चेतावनी दी है। सबसे बड़ी चिंता भारत के लिए है, क्योंकि अमेरिकी दबाव और दुबई के रास्ते कारोबार में आई रुकावट से भारतीय चावल, चाय और दवा निर्यात प्रभावित हो सकता है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने इसे ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ नाम दिया है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इसका उद्देश्य ईरान की आर्थिक गतिविधियों और उससे जुड़े विदेशी नेटवर्क पर इतना दबाव बनाना है कि तेहरान के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वित्तीय लेन-देन करना मुश्किल हो जाए।
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने इसे अभूतपूर्व अभियान बताया है। वॉशिंगटन ने साफ संकेत दिया है कि जो देश और कंपनियां ईरान के साथ कारोबार जारी रखेंगी, उनके खिलाफ भी आगे सेकेंडरी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। अमेरिका ने नए पैकेज के तहत करीब 60 व्यक्तियों, संस्थाओं और जहाजों को प्रतिबंधों के दायरे में लिया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इनमें कुछ ऐसे नेटवर्क शामिल हैं जिन पर ईरान के मिसाइल और परमाणु कार्यक्रमों के लिए सामान उपलब्ध कराने, साइबर गतिविधियों तथा तेल के निर्यात और उससे होने वाली कमाई को स्थानांतरित करने में मदद करने का आरोप है। लेकिन इस बार निशाना सिर्फ ईरान के अंदर मौजूद संस्थाएं नहीं हैं। अमेरिका विदेशी कंपनियों और बिचौलियों पर भी दबाव बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।
नए अभियान में अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने ईरानी अर्थव्यवस्था से जुड़े पांच महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया है। डिजिटल एसेट्स, टेक्नोलॉजी, सोना, विमानन और शिपिंग अब प्रतिबंधों के संभावित दायरे में और ज्यादा मजबूती से शामिल हैं। अमेरिका का आरोप है कि ईरान डिजिटल एसेट्स का इस्तेमाल धन के लेन-देन और प्रतिबंधों से बचने के लिए करता है। सोने का इस्तेमाल वह अपनी संपत्ति को सुरक्षित रखने के लिए करता है, जबकि विमानन और समुद्री नेटवर्क के जरिए उपकरण, पैसा और तेल स्थानांतरित किए जाते हैं। अमेरिका के नए प्रतिबंधों का सीधा असर भारत के ईरान को होने वाले निर्यात पर पड़ने की आशंका है। रॉयटर्स के मुताबिक, भारत लंबे समय से ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में रहा है। हालांकि दोनों देशों के बीच व्यापार 2018-19 के करीब 17 अरब डॉलर के स्तर से 90 प्रतिशत से ज्यादा गिर चुका है।