Tuesday, 29 Sep 2026

गोद लेने वाली हर मां को 12 हफ्ते की मैटरनिटी लीव: सुप्रीम कोर्ट

नईदिल्ली (18 मार्च 26)। देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने गोद लेने वाली महिलाओं के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला सुनाया है। अब किसी भी उम्र के बच्चे को गोद लेने पर महिला को 12 हफ्ते का मातृत्व अवकाश देना अनिवार्य होगा। पहले यह सुविधा केवल उन मामलों तक सीमित थी, जहां गोद लिया गया बच्चा तीन महीने से कम उम्र का हो। अदालत ने इस शर्त को अब असंवैधानिक बताते हुए समाप्त कर दिया है।

कोर्ट ने Code on Social Security 2020 की धारा 60(4) को निरस्त करते हुए कहा कि यह प्रावधान Article 14 of Indian Constitution और Article 21 of Indian Constitution के खिलाफ है। अदालत का कहना है कि जैविक और गोद लेने वाली माताओं के बीच किसी भी तरह का अंतर करना उचित नहीं है। मातृत्व लाभ का उद्देश्य मां और बच्चे के बीच देखभाल और भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत करना है। अदालत ने अपने फैसले में यह स्पष्ट किया कि माता-पिता बनने का अधिकार केवल जैविक प्रक्रिया तक सीमित नहीं है। गोद लेना भी इस अधिकार का हिस्सा है, जिससे पारिवारिक संरचना की समझ और अधिक व्यापक हो जाती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि बड़े बच्चों को नए माहौल में ढलने में अधिक समय लगता है, इसलिए मां को पर्याप्त अवकाश मिलना बेहद जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को पितृत्व अवकाश पर भी नीति बनाने की सलाह दी है। अदालत ने कहा कि बच्चों की देखभाल को केवल मां की जिम्मेदारी मानना सही नहीं है, बल्कि इसे जेंडर-न्यूट्रल और समावेशी बनाना चाहिए। यह फैसला कर्नाटक की वकील हंसनन्दिनी नंदुरि द्वारा दायर याचिका पर सुनाया गया, जिसकी पैरवी अधिवक्ता बानी दीक्षित ने की। याचिका में बताया गया था कि भारत में अधिकतर गोद लिए जाने वाले बच्चे तीन महीने से बड़े होते हैं, ऐसे में पुरानी व्यवस्था न केवल अव्यवहारिक थी, बल्कि इससे महिलाओं के साथ असमानता भी पैदा होती थी।

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