Monday, 28 Sep 2026

'सुपर-अल नीनो': 5 लाख लोगों की जान का खतरा

शिकागो (25 सितंबर 26)। एक नई चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है जिसमें बताया गया है कि अल नीनो की वजह से पड़ने वाली भीषण गर्मी से फरवरी तक दुनिया भर में लगभग 5 लाख लोगों की जान जा सकती है।  दरअसल, यूनिवर्सिटी ऑफ़ शिकागो की क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के रिसर्चर्स ने बुधवार को कहा कि इस साल के 'सुपर-अल नीनो' की वजह से पड़ने वाली भीषण गर्मी से फरवरी 2027 के बीच दुनिया भर में 4,51,000 अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं।

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि आने वाले महीनों में वैश्विक भू-भाग का तापमान सामान्य से करीब 1.2 डिग्री सेल्सियस (2.1 फ़ारेनहाइट) अधिक रह सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, यह स्थिति बिल्कुल वैसी ही है जैसी जलवायु परिवर्तन के कारण आज से 20 साल बाद होने का अनुमान जताया गया था। इसके चलते सामान्य वर्षों की तुलना में अत्यधिक गर्मी वाले दिनों की संख्या में 44% की वृद्धि हो सकती है। विशेषज्ञों ने इसे "हमारे भविष्य की एक झलक" करार दिया है, जो दुनिया के ढलने से पहले ही सामने आ गई है। सितंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच अत्यधिक गर्मी से होने वाली मौतों का सबसे ज़्यादा असर नाइजीरिया पर पड़ने की संभावना है, जहां 31,400 मौतें हो सकती हैं, इसके बाद इंडोनेशिया में 19,300 और सूडान में 17,600 मौतें हो सकती हैं।अफ्रीका के साहेल क्षेत्र (जिसमें नाइजर, चाड, नाइजीरिया और सूडान शामिल हैं) में गर्मी के कारण छह महीने की अवधि में 66,800 अतिरिक्त मौतें होने की संभावना है। रिसर्चर्स का अनुमान है कि फिलीपींस, वियतनाम, थाईलैंड और कंबोडिया में कुल मिलाकर 19,400 अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं। अगर अल नीनो 2027 तक जारी रहता है, तो अतिरिक्त मौतों की संख्या और भी बढ़ सकती है; उत्तरी गोलार्ध के प्रमुख क्षेत्रों, जिनमें भारत और पाकिस्तान शामिल हैं, पर गर्मियों के महीनों में इसका सबसे ज़्यादा असर पड़ने की आशंका है।

रिपोर्ट के अनुसार, भीषण गर्मी से होने वाली ये मौतें अल नीनो की वजह से होने वाली अन्य भीषण मौसम की घटनाओं -जैसे आग, बाढ़ और सूखे - से होने वाली मौतों के अलावा होंगी। क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब ने इस साल के अल नीनो को 'भविष्य की एक झलक' बताया है, क्योंकि इससे ऐसे तापमान देखने को मिल रहे हैं जो कुछ ही दशकों में सामान्य हो जाएंगे। लैब ने कहा कि आने वाले महीनों में गर्मी से होने वाली मौतों से निपटने के लिए ज़्यादा प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में आपातकालीन उपाय किए जाने चाहिए। यूनिवर्सिटी ऑफ़ शिकागो के अर्थशास्त्री और लैब के सह-संस्थापक माइकल ग्रीनस्टोन ने कहा, 'यह रिपोर्ट निर्णय लेने वालों को यह समझने में मदद करती है कि आने वाले महीनों में हज़ारों जानें बचाने के लिए अभी कहां आपातकालीन कदम उठाए जा सकते हैं।'

Tags:

Follow us

This question is not available..!