वाशिंगटन (14 जनवरी 25)। हजारों भारतीयों का सपना होता है कि वे अमेरिका में एच-1बी वीजा प्राप्त करें, जो उन्हें वहां काम करने का अवसर देता है। यह वीजा खासकर उन लोगों के लिए होता है जिनके पास खास कौशल होते हैं, और यह वीजा उन्हें अमेरिका में नौकरी पाने का एक रास्ता देता है। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिकी सरकार में बदलाव ने इस वीजा प्रक्रिया को लेकर कई अनिश्चितताएं पैदा कर दी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमेशा कहा है कि उन्हें अमेरिकी नागरिकों को काम पर रखना प्राथमिकता है और विदेशी कामगारों को लेकर कड़ी नीतियां लागू करने का वादा किया है। इसके परिणामस्वरूप, कई भारतीयों का सपना टूट सकता है क्योंकि एच-1बी वीजा पर बहस तेज हो गई है और कई जॉब ऑफर भी रद्द हो गए हैं।
एच-1बी वीजा अमेरिका में काम करने के लिए दिया जाने वाला एक अस्थायी वीजा है, जो खासकर उन विदेशियों को दिया जाता है जिनके पास खास कौशल होते हैं। इस वीजा के तहत भारत के नागरिकों की संख्या सबसे अधिक है। भारतीय एच-1बी वीजा धारक अमेरिका में सबसे बड़ी संख्या में होते हैं और वे ज्यादातर तकनीकी, इंजीनियरिंग और कंप्यूटर संबंधित कामों में लगे होते हैं। भारत से अमेरिका जाने वाले छात्रों की संख्या में भारी बढ़ोतरी देखी गई है। एक साल के अंदर भारतीय छात्रों की संख्या में 35% का इजाफा हुआ है। हालांकि, अब ट्रंप के प्रशासन के कारण इन छात्रों और वीजा धारकों को अपने भविष्य को लेकर चिंता होने लगी है। कई लोगों ने जॉब ऑफर मिलने के बाद भी उन्हें रद्द होते हुए देखा है।