नईदिल्ली (14 सितंबर 26)। पहलगाम आतंकी हमले को लेकर BRICS के मंच से आए कड़े संदेश ने हमले में मारे गए 26 लोगों के परिवारों को भावुक कर दिया है। नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की निंदा की गई और आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने का आह्वान किया गया। हमले में मारे गए कानपुर के शुभम द्विवेदी के पिता संजय द्विवेदी और उनकी पत्नी ऐशान्या द्विवेदी ने इस फैसले पर संतोष जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया।
शुभम द्विवेदी की पत्नी ऐशान्या द्विवेदी ने कहा कि वह भारत की ओर से वैश्विक मंच पर आतंकवाद जैसे गंभीर मुद्दे को उठाने के लिए सभी 26 परिवारों की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दिल से आभार व्यक्त करती हैं। उन्होंने कहा कि 26 परिवारों के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे उनके अपनों के बलिदान को सम्मान मिलता है। उन्होंने कहा कि सरकार आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कदम उठा रही है और आगे भी उठाती रहेगी। ऐशान्या ने कहा कि BRICS जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक रूप से जीरो टॉलरेंस की नीति की मांग किया जाना एक मजबूत संदेश है। उन्होंने आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए किसी खास धर्म के नाम या उसके खिलाफ हमलों के इस्तेमाल की भी निंदा की। शुभम की पत्नी ने कहा कि सरकार आतंकवाद के खिलाफ बड़े से बड़ा कदम उठा रही है। उनके मुताबिक, आतंकवाद के खिलाफ भारत की कार्रवाई और ऑपरेशन सिंदूर इसी दृढ़ नीति का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि BRICS के मंच पर पहलगाम हमले का मुद्दा उठना यह दिखाता है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी आवाज को वैश्विक स्तर पर मजबूती से उठा रहा है।
शुभम द्विवेदी के पिता संजय द्विवेदी ने भी BRICS के फैसले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस फैसले से हमले से प्रभावित परिवारों को संतुष्टि मिली है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार की ओर से आतंकवाद के खिलाफ लड़ी जा रही लड़ाई को अब वैश्विक स्तर पर समर्थन मिल रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ प्रस्ताव पारित करने से आतंकवाद खत्म नहीं होगा। संजय द्विवेदी ने चिंता जताई कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने जिन आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था, वहां दोबारा गतिविधियां शुरू होने की खबरें सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को केवल बयानों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए।