जबलपुर (20 अप्रैल 25)। एक मामले पर हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को कहा है कि सेवाएं देने वाले कर्मचारियों का वह शोषण न करे। जस्टिस संजय द्विवेदी की एकलपीठ ने शहडोल जिले में चतुर्थ श्रेणी के पद कार्यरत तीन कर्मचारियों की याचिका पर कहा कि आज के दौर में दो हजार रुपए की पगार में होता क्या है। ऐसा नहीं है कि याचिकाकर्ता कर्मचारी सीमित घंटों के लिए ही अपनी सेवाएं दे रहे हैं। अदालत ने आयुक्त लोक संचालनालय को कहा कि जब समय-समय पर सरकार अन्य कर्मचारियों के वेतन का पुनरीक्षण करती है, तब याचिकाकर्ताओं के मामले पर भी विचार होना ही चाहिए। इस मत के साथ अदालत ने 60 दिनों के भीतर कार्रवाई करने के निर्देश सरकार को दिए।
यह याचिका शहडोल जिले की जयसिंह नगर तहसील के महावीर यादव, रामनरेश यादव और रामप्रताप यादव की ओर से दायर की गई थी। आवेदकों का कहना था कि वे तीनों क्रमश: भृत्य चौकीदार और जलवाहक के पदों पर पिछले कई वर्षों से अपनी सेवाएं शासकीय मॉडल स्कूल कौआसरई में दे रहे हैं। आवेदकों का कहना था कि वर्ष 2015-16 तक तो उनका वेतन 6 हजार रुपए प्रतिमाह था, जो घटाकर दो हजार रूपए कर दिया गया। इस बारे में दिए गए आवेदनों के बावजूद कोई कार्रवाई न होने पर यह याचिका वर्ष 2023 में दायर की गई थी। मामले पर हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता कमलेश कुमार द्विवेदी ने पक्ष रखा। सुनवाई में शहडोल के जिला शिक्षा अधिकारी फूल सिंह मरपाछी भी हाजिर रहे। सुनवाई के बाद अदालत ने आयुक्त लोक संचालनालय को वित्त विभाग के परिपत्रों के तहत याचिकाकर्ताओं के वेतनमान पर विचार करने के निर्देश दिए।