गोवा (09 अक्टूबर 26)। बॉलीवुड के मशहूर एक्टर नाना पाटेकर का गुरुवार को गोवा में कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया। एक्टर एक इवेंट के सिलसिले में गोवा में थे, जहां 4 अक्टूबर को डोना पाउला में वे आखिरी बार सार्वजनिक रूप से देखे गए थे। नाना को गोवा में 'सम्राट क्लब इंटरनेशनल' के इंस्टॉलेशन समारोह को संबोधित करते हुए देखा गया। इस कार्यक्रम में उन्होंने सफ़ेद कुर्ता और सफ़ेद स्कार्फ़ (गमछा) पहना हुआ था।
नाना पाटेकर ने हिंदी और मराठी सिनेमा के बीच आसानी से काम किया। उन्हें कभी भी किसी बड़े परिचय की ज़रूरत नहीं पड़ी। उनकी आवाज़, हाव-भाव और संवाद की कुछ लाइनों में भी एक खास तरह की तीव्रता लाने की क्षमता ने उन्हें कई पीढ़ियों के दर्शकों के बीच तुरंत पहचान दिलाई। महाराष्ट्र के रायगढ़ ज़िले के मुरुड-जंजीरा में विश्वनाथ पाटेकर के रूप में जन्मे नाना पाटेकर केवल गंभीर नाटकों या दमदार किरदारों तक ही सीमित नहीं थे। वे कमर्शियल सिनेमा और कॉमेडी, दोनों में ही बहुत असरदार थे। 'वेलकम' फ़िल्म में उदय शेट्टी के किरदार ने उन्हें दर्शकों की एक नई पीढ़ी से परिचित कराया और यह किरदार उनके बाद के करियर के सबसे यादगार कॉमिक किरदारों में से एक बन गया। सालों तक सिनेमा में अपने योगदान के लिए नाना पाटेकर को कई बड़े सम्मान मिले। उन्हें तीन नेशनल फ़िल्म अवॉर्ड और चार फ़िल्मफ़ेयर अवॉर्ड मिले, साथ ही महाराष्ट्र स्टेट फ़िल्म अवॉर्ड और अन्य सम्मान भी प्राप्त हुए। 2013 में, उन्हें सिनेमा और कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया। उनके जाने के बाद उनका काम एक ऐसी विरासत के तौर पर बचा है जो कई पीढ़ियों और जॉनर में फैला हुआ है। 'परिंदा' और 'क्रांतिवीर' से लेकर 'अब तक छप्पन' और 'वेलकम' तक, नाना पाटेकर ने ऐसे किरदार निभाए जिन्हें दर्शक फ़िल्म खत्म होने के बाद भी लंबे समय तक याद रखते हैं। भारतीय सिनेमा ने एक ऐसे अभिनेता को खो दिया है जिनकी जगह कोई और नहीं ले सकता। अभिनेता नाना पाटेकर ने बाॅलीवुड में की दमदार फिल्में दी। इसके अलावा वह बेहद साधारण और सिंपल जिंदगी में जीते थे। बता दें कि करोंड़ों की संपत्ति के बावजूद भी वह एक छोटे से फ्लैट में रहते थे। नाना अपनी निजी जिंदगी को हमेशा मीडिया और चकाचौंध से दूर रखते थे।
भारतीय सिनेमा में नाना पाटेकर को ऐसे अभिनेता के रूप में याद किया जाएगा, जिन्होंने नायक, खलनायक और गंभीर चरित्रों से लेकर हास्य भूमिकाओं तक को अपनी खास शैली में निभा कर सम्मान और प्रशंसा अर्जित की। करीब पांच दशक के फिल्मी सफर में उन्होंने ऐसे कई किरदार निभाए, जो दर्शकों की स्मृतियों में लंबे समय तक बने रहे। उनके अभिनय में आक्रोश, संवेदना और सहजता का ऐसा मेल था, जिसने उन्हें अपने दौर के कलाकारों में एक बेहद खास मुकाम पर पहुंचा दिया। नाना पाटेकर का दुनिया से जाना सिर्फ एक अभिनेता का जाना नहीं है, बल्कि अभिनय की उस विशिष्ट परंपरा के एक महत्वपूर्ण अध्याय का समाप्त होना है, जिसमें संवाद केवल बोले नहीं जाते, बल्कि महसूस कराए जाते हैं। उनकी आवाज, चेहरे के भाव, आंखों की बेचैनी और संवाद अदायगी ने उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे अलग और प्रभावशाली कलाकारों में शामिल किया।