मुंबई (29 जनवरी 26)। सोने और चांदी के दाम में गुरुवार को जोरदार तेजी देखने को मिली, लेकिन निवेशकों की नजर इस बार गोल्ड ETF पर रही। वायदा बाजार में उछाल और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सोने ने सिल्वर को पीछे छोड़ते हुए मजबूत प्रदर्शन किया। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और ब्याज दरों के संकेतों ने सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में प्राथमिकता दिलाई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में सोने के फरवरी वायदा कॉन्ट्रैक्ट में करीब 9% की तेज बढ़त दर्ज की गई और यह 1,80,779 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया।
अप्रैल और जून के कॉन्ट्रैक्ट भी इसी रफ्तार से बढ़े और नए शिखर बन गए। चांदी में भी तेजी रही, हालांकि यह थोड़ी धीमी रही। मार्च वायदा कॉन्ट्रैक्ट लगभग 6% बढ़कर 4,07,456 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंचा। मई और जुलाई के कॉन्ट्रैक्ट में भी इसी स्तर की बढ़त दर्ज हुई। वायदा बाजार में तेजी का असर सीधे ETF में दिखाई दिया। Kotak Gold ETF में 13% से अधिक की उछाल दर्ज हुई और यह 155 रुपये के उच्च स्तर पर पहुंच गया। Baroda BNP Paribas Gold ETF में करीब 10% की बढ़त रही। Axis Gold ETF, 360 ONE Gold ETF, Union Gold ETF और LIC गोल्ड ETF में भी लगभग 9% की तेजी देखी गई। सिल्वर ETF में भी मजबूती रही। मोतीलाल ओसवाल सिल्वर ETF लगभग 8% चढ़कर 371.91 रुपये के नए उच्च स्तर पर पहुंच गया। निप्पॉन इंडिया और अन्य सिल्वर ETF में भी इसी तरह की तेजी देखी गई, लेकिन कुल मिलाकर गोल्ड ETF ने बेहतर प्रदर्शन किया।
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका के बढ़ते कर्ज और वैश्विक व्यापार ढांचे में अनिश्चितता निवेशकों को सतर्क कर रही है। इसके अलावा अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में स्थिरता की घोषणा ने सोने और चांदी जैसे बिना ब्याज वाले निवेशों को आकर्षक बना दिया। पिछले एक साल में चांदी ने लगभग 200% की शानदार बढ़त दर्ज की, जबकि सोने में करीब 80% की तेजी रही। इसके चलते गोल्ड-सिल्वर रेशियो महामारी के समय 127 से घटकर अब 50 के करीब आ गया है। इसका अर्थ है कि चांदी पहले ही तेज गति से बढ़ चुकी है, जबकि हाल के समय में सोने ने स्थिर और मजबूत प्रदर्शन किया है।