बालाघाट (12 अक्टूबर 26)। मध्यप्रदेश में विलुप्त हो चुके जंगली भैंसों को उनके प्राकृतिक आवास में पुनः स्थापित करने की दिशा में रविवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार परिक्षेत्र में जंगली भैंसा पुनर्स्थापना कार्यक्रम के अंतर्गत क्वारंटाइन अवधि पूरी कर चुके आठ जंगली भैंसों को एक हेक्टेयर के छोटे बाड़े से 17 हेक्टेयर क्षेत्रफल में निर्मित बड़े बाड़े में विमुक्त किया। इस पहल का उद्देश्य जंगली भैंसों को क्षेत्र की आबोहवा और पर्यावरण के अनुकूल बनाकर उनके प्राकृतिक आवास में पुनर्स्थापित करना है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर कहा कि मध्यप्रदेश के लिए आज का दिन महत्वपूर्ण है। लगभग सौ वर्षों बाद कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार परिक्षेत्र में जंगली भैंसों की पुनर्स्थापना का दूसरा चरण प्रारंभ हो रहा है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के सहयोग से काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से लगभग 2200 किलोमीटर की दूरी तय कर आठ जंगली भैंसों को मध्यप्रदेश लाया गया है। वर्षाकाल समाप्त होने के बाद इन्हें प्राकृतिक आवास में बसाने की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा। जंगली भैंसा पुनर्स्थापना परियोजना के तहत असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से दो चरणों में आठ जंगली भैंसों को कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार परिक्षेत्र में लाया गया था। प्रथम चरण में 28 अप्रैल 2026 को तीन मादा और एक नर जंगली भैंसे को विशेष रूप से निर्मित एक हेक्टेयर क्षेत्रफल के बाड़े में छोड़ा गया। इसके बाद 9 मई 2026 को तीन मादा और एक नर जंगली भैंसे को इसी बाड़े में रखा गया। कुल छह मादा और दो नर जंगली भैंसों को छोटे बाड़े में क्वारंटाइन कर रखा गया, ताकि वे यहां के वातावरण और जलवायु के अनुरूप स्वयं को ढाल सकें। क्वारंटाइन अवधि पूरी होने के बाद रविवार 11 अक्टूबर को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी आठ जंगली भैंसों को 17 हेक्टेयर के बड़े बाड़े में स्थानांतरित कर विमुक्त किया। मध्यप्रदेश के वन क्षेत्रों से जंगली भैंसे लगभग सौ वर्ष पहले विलुप्त हो चुके थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की प्रेरणा से वन विभाग ने इस प्रजाति को पुनः स्थापित करने के लिए विशेष योजना तैयार की है।