नईदिल्ली (20 मई 26)। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सार्वजनिक जगहों पर आवारा कुत्तों के प्रबंधन पर अपने पहले के निर्देशों को वापस लेने से इनकार कर दिया। साथ ही, पूरे देश में 'पशु जन्म नियंत्रण' (ABC) ढांचे को और सख्ती से लागू करने के लिए कई नए निर्देश जारी किए।
जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की बेंच ने कुत्तों से प्यार करने वालों और पशु अधिकार समूहों द्वारा दायर कई अर्जियों को खारिज कर दिया। इन अर्जियों में पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी निर्देशों में बदलाव की मांग की गई थी। इन निर्देशों में यह अनिवार्य किया गया था कि स्कूलों, अस्पतालों, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों जैसी संवेदनशील सार्वजनिक जगहों से पकड़े गए आवारा कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद वापस उन्हीं जगहों पर नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
फैसला सुनाते हुए, जस्टिस नाथ की अगुवाई वाली बेंच ने जोर देकर कहा कि 'गरिमा के साथ जीने के अधिकार' में सार्वजनिक जगहों पर कुत्तों के हमले के डर के बिना जीने का अधिकार भी शामिल है। बेंच ने आवारा कुत्तों के काटने की बढ़ती समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने में नाकाम रहने पर अधिकारियों को फटकार लगाई। हमलों की कई रिपोर्टों का हवाला देते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मुद्दा अब 'बेहद गंभीर रूप' ले चुका है और मौजूदा निर्देशों तथा कानूनी नियमों को लागू करने में गंभीर कमियों को दर्शाता है। जस्टिस नाथ की अगुवाई वाली बेंच ने चेतावनी दी कि जो अधिकारी उसके निर्देशों का पालन करने में विफल रहेंगे, उन पर अदालत की अवमानना और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
व्यापक निर्देश जारी करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) को ABC नियमों के तहत बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए समय-सीमा के भीतर कदम उठाने का आदेश दिया। इसने हर जिले में कम से कम एक पूरी तरह से काम करने वाला ABC केंद्र स्थापित करना अनिवार्य कर दिया, जो सर्जिकल सुविधाओं, प्रशिक्षित कर्मचारियों और पर्याप्त लॉजिस्टिक्स सहायता से सुसज्जित हो। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे जनसंख्या घनत्व और भौगोलिक आवश्यकताओं के आधार पर ऐसे केंद्रों की संख्या बढ़ाएं, और क्षमता-निर्माण के उपाय करें, जिसमें कर्मचारियों का प्रशिक्षण, आश्रय स्थलों को मजबूत करना और समन्वित टीकाकरण अभियान चलाना शामिल है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि सभी सरकारी चिकित्सा सुविधाओं में एंटी-रेबीज टीके और इम्यूनोग्लोबुलिन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होने चाहिए, साथ ही कुत्तों के काटने के मामलों से निपटने के लिए एक मजबूत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रतिक्रिया तंत्र भी होना चाहिए।