भोपाल (25 अगस्त 26)। महिला सुरक्षा और न्याय की व्यवस्था को अधिक संवेदनशील, प्रभावी और पीड़ित-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश राज्य महिला आयोग एवं जनसाहस फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को 'सर्वाइवर सेन्ट्रिक स्ट्रेटजी एवं जस्टिस' विषय पर राज्य स्तरीय एक दिवसीय रणनीतिक संवाद कार्यशाला हुई। कार्यशाला में पुलिस, विधिक सेवा, चिकित्सा, बाल संरक्षण एवं महिला सुरक्षा से जुड़े विभागों के अधिकारियों और विशेषज्ञों ने पीड़ित महिला को शिकायत से लेकर न्याय, उपचार, कानूनी सहायता, मनोसामाजिक सहयोग और सम्मानजनक पुनर्वास तक समग्र सहायता उपलब्ध कराने की रणनीति पर विचार-विमर्श किया।
कार्यशाला में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि महिला हिंसा से जुड़े किसी भी प्रकरण में पीड़िता को केवल एक ‘केस’ या प्रकरण के रूप में नहीं, बल्कि एक व्यक्ति के रूप में देखा जाए। आयोग की सदस्य साधना स्थापक ने कहा कि हिंसा के अनेक रूप हैं और समाज को हर प्रकार की हिंसा के विरुद्ध मजबूती से खड़ा होना होगा। महिलाओं का स्वावलंबी और सशक्त होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि महिला आयोग महिलाओं को त्वरित न्याय दिलाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष निवेदिता शर्मा ने कहा कि महिलाओं और बच्चों से जुड़े किसी भी प्रकरण में सबसे पहले संवेदनशीलता के साथ पीड़ित की बात सुनी जानी चाहिए। मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सदस्य सचिव सुश्री सुमन श्रीवास्तव ने कहा कि पीड़ित की वास्तविक जरूरतों को समझकर उसी के अनुरूप सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए। अ
डीआईजी कम्युनिटी पुलिसिंग विनीत कपूर ने महिला और बाल सुरक्षा से जुड़े मामलों में पुलिस व्यवस्था के स्तर पर आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों और अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने पुलिस, महिला एवं बाल सुरक्षा से जुड़े विभागों तथा विभिन्न पुलिस विंग के अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए संयुक्त प्रशिक्षण की आवश्यकता बताई। डीसीपी, पुलिस कमिश्नरेट भोपाल मंजूलता खत्री ने महिला हिंसा के मामलों में संवेदनशील पुलिस रिस्पोंस को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि जब कोई पीड़ित महिला अस्पताल पहुंचती है, तब उसके सम्मान और गरिमा की रक्षा की प्रक्रिया अस्पताल के गेट पर मौजूद सुरक्षा गार्ड से ही शुरू हो जानी चाहिए। कार्यशाला के प्रथम सत्र में मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग के सदस्य सचिव सुरेश तोमर ने स्वागत उद्बोधन दिया। कार्यशाला में महिला-केंद्रित मेडिको-लीगल सहायता, पुलिस रिस्पांस, कानूनी सहायता, मनोसामाजिक परामर्श और आर्थिक पुनर्वास जैसे विषयों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।