भोपाल (22 अगस्त 24)। आयुर्वेद भारत ही नहीं अपितु विश्व की प्राचीनतम विधा है। जीवन जीने की पद्धति है, जिसमें प्रकृति के प्रति कृतज्ञता के भाव का समावेश है। प्रकृति एवं मानव सहित समस्त चराचर के प्रति कृतज्ञता के भाव का प्रकटीकरण संस्कृत भाषा के माध्यम से भावानुकूल होता है। संस्कृत भाषा के बिना आयुर्वेद की कल्पना भी संभव नहीं है। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने बुधवार को भोपाल स्थित महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान के भरतनाट्यगृहम् में संस्कृत सप्ताह महोत्सव के उपलक्ष्य पर 'आयुर्वेद में संस्कृत भाषा की महत्ता' विषय पर आयोजित संगोष्ठी के शुभारंभ के अवसर पर कही। मंत्री परमार ने सभी को संस्कृत दिवस एवं संस्कृत सप्ताह की बधाई एवं शुभकामनाएं भी दीं। इस अवसर पर डॉ अशोक कुमार वार्ष्णेय, डॉ जागेश्वर पटले एवं संस्थान के निदेशक प्रभातराज तिवारी सहित विभिन्न विषयविद, गणमान्य जन एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।