इंदौर (09 अगस्त 26)। भारत के मुख्य न्यायाधीश और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रमुख संरक्षक न्यायमूर्ति सूर्यकांत, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उच्चतम न्यायालय के अन्य न्यायमूर्तिगणों ने शनिवार को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में दो दिवसीय वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस - 'इन्हेंसिंग एक्सेस जस्टिस' के उद्घाटन सत्र का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। यह कॉन्फ्रेंस 9 अगस्त तक चलेगी। कॉन्फ्रेंस का आयोजन राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली (नालसा), मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर (सालसा) और मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के संयुक्त तत्वावधान में किया गया है। इस 2 दिवसीय कॉन्फ्रेंस का विषय 'इन्हेंसिंग एक्सेस टू जस्टिस' तथा इसकी थीम 'एकजुट आवाज, सशक्त भविष्य : संवाद, गरिमा और समावेशन के माध्यम से न्याय तक पहुंच' रखी गयी है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने नालसा की शिक्षा स्कीम तथा नालसा के थीम सॉन्ग को इंडियन साइन लैंग्वेज में लाँच किया। कॉन्फ्रेंस में नालसा के थीम सॉन्ग का प्रदर्शन कर इसकी योजनाओं के हिंदी संस्करण और ब्रेल लिपि में गाइड का विमोचन किया गया। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, मुख्यमंत्री डॉ. यादव सहित अन्य सभी अतिथियों ने 'जस्टिस टू चिल्ड्रन लिटिगेशन फेलोशिप प्रोग्राम' तथा मध्यस्थता पर सर्टिफिकेट कोर्स - विवाद से सहमति की ओर का भी शुभारंभ किया। केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुनराम मेघवाल सहित अन्य न्यायमूर्तियों ने कॉन्फ्रेंस में आयोजकों द्वारा तैयार की गई 'न्याय के स्वर' नामक पुस्तक का विमोचन किया।
सीजेआई न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि 2 पक्षों में विवाद के हल में संवाद की प्रक्रिया अनेक विचारों से एकमत या आवाज तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सबके न्याय की पहुंच सिर्फ कानून के आधार पर तैयार नहीं हो सकती है। यह संवाद से ही संभव है। न्याय की प्रक्रिया केवल न्यायपालिका या किसी एक संस्था से पूरी नहीं होती है। इस यज्ञ में सबको मिलकर आहूति देनी होती है। किसी विवाद में मध्यस्थता की प्रक्रिया सामने वाले के सुनने से प्रारंभ होती है। न्याय मिलने से पहले पीड़ित को यह विश्वास होना आवश्यक है कि उसकी पीड़ा या समस्या को कोई सुन रहा है। उन्होंने कहा कि सभी की समस्याएं अलग-अलग हो सकती हैं, परंतु हर समस्या का समाधान एक जैसा नहीं होगा। समस्या की प्रकृति के अनुसार हमें अलग तरीके से सोचकर उसका समाधान देना होगा। स्थानीय समस्या को उसी सोच के साथ निदान तक लेकर जाना पड़ेगा। सीजेआई न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि किसी पीड़ित की समस्या और उसके दुख-दर्द को हमें उसकी अपनी भाषा में अंर्तमन से सुनना पड़ेगा। इससे समस्या को समझने और उसका निदान करने में बड़ा अंतर देखने को मिलेगा और यही अंतिम न्याय का आधार बनेगा। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था के संदर्भ में सशक्त भविष्य, गरिमा, समावेशन सिर्फ शब्द नहीं, यह विधिक सहायता की वास्तविक परिभाषा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर के न्याय के प्रति समर्पण का जिक्र किया। लोकमाता के लिए न्याय सबके लिए समान अधिकार था। वे इकलौती महिला शासक थीं, जो प्रतिदिन नागरिकों, किसानों और विधवाओं से मुलाकात कर उनकी समस्याओं का समाधान करती थीं। वे सीधे नागरिकों से संवाद करती थीं, उनके शासनकाल में किसी के साथ भेदभाव नहीं होता था। इंदौर नगरी में इस सम्मेलन के आयोजन के लिए मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बधाई का पात्र है।
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा कि नालसा की शिक्षा स्कीम और साइन लैंग्वेज में थीम सॉन्ग न्याय की पहुंच को जन-जन तक पहुंचाने में सहायक सिद्ध होगा। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की योजनाओं के हिंदी संस्करण और ब्रेल लिपि में गाइड का विमोचन दृष्टि बाधितों के लिए न्याय की आस बनकर सामने आएगा। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री मनमोहन ने कहा कि न्याय केवल विधायी कानून के पुलिंदों और न्यायालयों के परिभाषित करने से संभव नहीं होता है। यह एक विश्वास है कि जब भी कोई मुश्किल में है, तो वह फोरम तक पहुंचे और समाधान प्रक्रिया की सहायता प्राप्त कर सके, जहां उसे न्याय मिलेगा। आज न्याय प्रक्रिया को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए संवाद, सम्मान और समानता पर जोर देनी की आवश्यकता है। केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि भारतीय न्याय व्यवस्था में न्याय केवल न्यायालयों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक इसकी पहुंच हो, यह हमारी प्रतिबद्धता है। दुनिया में भारत की पहचान लोकतंत्र की जननी के तौर पर है। हमारी सभ्यता ने रूल ऑफ लॉ, नेचुरल जस्टिस, मध्यस्थ संवाद और लोक कल्याण की परंपरा को आत्मसात किया है। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक रुसिया ने कहा कि मालवा की पावन धरती और लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की धरती पर यह सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इंदौर शहर अपनी सांस्कृतिक विरासत, अतुलनीय आतिथ्य, जीवंत परंपरा ही नहीं बल्कि अपनी संवेदनशीलता और सहनशीलता के लिए भी देश में विशेष पहचान रखता है। यह सम्मेलन हमारे संकल्प को नई दिशा प्रदान करेगा।
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति आनंद पाठक ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। कॉन्फ्रेंस में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सतीशचंद्र शर्मा, न्यायाधीश न्यायमूर्ति विजय विश्नोई, न्यायाधीश न्यायमूर्ति आलोक आराधे, न्यायाधीश न्यायमूर्ति शील नागु, न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा, उच्च न्यायालय गुजरात की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल सहित विभिन्न उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशगण, विधिक सेवा प्राधिकरणों के वरिष्ठ पदाधिकारी, न्यायिक अधिकारी, महापौर पुष्यमित्र भार्गव सहित अनेक प्रतिष्ठित नागरिक और बड़ी संख्या में पैरा लीगल वॉलेंटियर्स उपस्थित थे।