नईदिल्ली (04 अक्टूबर 26)। उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने शनिवार को कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि विकास का लाभ हर व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने आगाह किया कि ऐसा नहीं होने पर युवाओं का लोकतंत्र में विश्वास कम हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि समावेश विकास को बनाए रखने में मदद कर सकती है। साथ ही आम सहमति के आधार पर निर्णय लेने की आवश्यकता पर जोर दिया। उपराष्ट्रपति ने यहां पांचवें कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए विकास की व्यापक संभावनाओं और भारतीय अर्थव्यवस्था पर बात की।
राधाकृष्णन ने कहा कि विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचना चाहिए। 'ऐसा नहीं हुआ तो लोग, विशेष रूप से युवा, लोकतंत्र में अपना विश्वास खो सकते हैं। दुनिया के कुछ हिस्सों में लोग फिर से कह रहे हैं कि साम्यवाद आ रहा है।' उन्होंने कहा, 'हम.... साम्यवाद के विरोधी नहीं हैं लेकिन एक प्रभावी लोकतांत्रिक व्यवस्था का स्थान शासन की कोई दूसरी प्रणाली नहीं ले सकती।' राज्यसभा के सभापति के रूप में उन्होंने कहा कि उनका दृढ़ विश्वास है कि न केवल भारत में बल्कि दुनिया में कहीं भी केवल स्वतंत्र और पारदर्शी चर्चा ही लोकतंत्र को मजबूत करती है। विकास का लाभ सभी तक पहुंचना लोकतंत्र की स्थिरता के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी बात कहने, काम करने, कानूनी तरीके से कमाने और अपनी इच्छा के अनुसार धन खर्च करने का अधिकार होना चाहिए।
राधाकृष्णन ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था अल्पविकसित से विकासशील और अब विकसित होने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि हम खुद को विकसित अर्थव्यवस्था तभी कह सकते हैं जब यह सभी का समावेशी विकास हो और इसके लाभ हर कोने-कोने तक पहुंचें। उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि तेजी से हो रहे बदलावों के इस दौर में, जब वैश्विक तनाव बढ़ रहे हैं और वैश्विक व्यापार बदल रहा है, हमें आम सहमति से फैसले लेने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हम चर्चा कर सकते हैं और एक ऐसे अंतिम निष्कर्ष पर पहुंच सकते हैं जो सभी को स्वीकार्य हो। राज्यसभा के सभापति के रूप में उनका दृढ़ विश्वास है कि केवल स्वतंत्र और पारदर्शी चर्चा ही लोकतंत्र को मजबूत करती है।