नईदिल्ली (31अगस्त 24)। वक्फ (संशोधन) विधेयक पर संसद की संयुक्त समिति की शुक्रवार को हुई बैठक में तीखा वाद-विवाद देखने को मिला और कई सदस्यों ने प्रस्तावित कानून के कुछ प्रावधानों का जोरदार विरोध किया तथा विपक्षी सदस्यों ने कुछ देर के लिए बैठक से बहिर्गमन भी किया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्य जगदंबिका पाल की अध्यक्षता वाली समिति ने करीब आठ घंटे तक चली बैठक में ऑल इंडिया सुन्नी जमीयतुल उलेमा और इंडियन मुस्लिम्स फॉर सिविल राइट्स (आईएमसीआर), उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड और राजस्थान मुस्लिम वक्फ बोर्ड के विचारों को सुना। 'उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ की घोषणा', वक्फ के रूप में संपत्ति के वर्गीकरण का निर्धारण करने में प्राथमिक प्राधिकारी के रूप में जिला कलेक्टर को अधिकार देने और केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य बोर्डों में गैर-मुसलमानों को शामिल करने के प्रावधान को लेकर विवाद देखने को मिला।
सूत्रों का कहना है कि भाजपा सदस्य दिलीप सैकिया द्वारा आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह के खिलाफ की गई कुछ टिप्पणियों के कारण विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। बैठक के दौरान हंगामा हुआ क्योंकि इंडियन मुस्लिम फॉर सिविल राइट्स और राजस्थान बोर्ड ऑफ मुस्लिम वक्फ, दोनों के प्रतिनिधि के रूप में एक वकील की उपस्थिति पर आपत्ति जताई गई। वकील की उपस्थिति के मुद्दे पर कांग्रेस सांसदों मोहम्मद जावेद और इमरान मसूद, अरविंद सावंत (शिवसेना-यूबीटी), संजय सिंह (आप), असदुद्दीन ओवैसी (एआईएमआईएम), द्रमुक के ए राजा, समाजवादी पार्टी के मोहिबुल्ला मोहम्मद सहित विपक्षी सदस्यों ने थोड़ी देर के लिए बैठक से वाकआउट किया। विपक्षी सदस्यों ने वक्फ अधिनियम में उपयोगकर्ता वाला प्रावधान हटाने पर भी चिंता व्यक्त की। विपक्षी सदस्यों ने तर्क दिया कि उत्तर प्रदेश में उपयोगकर्ता प्रावधान द्वारा वक्फ के तहत अधिसूचित एक लाख से अधिक संपत्तियों का स्वामित्व उक्त प्रावधान को हटाने के कारण अधर में लटक जाएगा और अतिक्रमण का रास्ता खुल सकता है। उन्होंने तर्क दिया कि 'उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ' के साक्ष्य नियम को कानूनी रूप से मान्यता देने से, वक्फ के रूप में लगातार उपयोग किए जाने वाले ऐतिहासिक स्थलों को संरक्षित किया जाएगा। सूत्रों ने बताया कि बैठक में भाजपा सदस्य मेधा कुलकर्णी और ओवैसी के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।