भोपाल (07 नवंबर 25)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वंदे मातरम् हर भारतीय की चेतना का स्वर है। यह सिर्फ राष्ट्रगीत नहीं, हमारा प्राण गीत भी है। वंदे मातरम वह उद्घोष है जिसने पराधीन भारत की धमनियों में स्वाभिमान का रक्त प्रवाहित किया। वंदे मातरम् ने देश में आजादी का अलख जगाया। वर्ष 1875 में स्वतंत्रता सेनानी बंकिमचंद्र चटर्जी की कलम से अमर गीत वंदे मातरम् की रचना हुई। उनके उपन्यास 'आनंद मठ' की इस रचना से क्रांति का शंखनाद हुआ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कल्पनाशीलता से आज वंदे मातरम् के 150वें स्मरणोत्सव के विशेष आयोजन हो रहे हैं। विभिन्न जिलों में प्रदेशवासी भी स्मरणोत्सव में भाग लेकर मातृभूमि के प्रति देशभक्ति और कृतज्ञता की भावना को अभिव्यक्त कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150वें स्मरणोत्सव पर शौर्य स्मारक में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुनर्मुद्रित पुस्तिका 'वंदे मातरम्-एक क्रांति गीत का साहित्येतिहासिक अध्ययन' का विमोचन किया। कार्यक्रम में पुलिस बैंड ने देशभक्ति गीत 'कदम-कदम बढ़ाए जा' की धुन प्रस्तुत की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल से वर्चुअली शामिल हुए। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के उद्बोधन का शौर्य स्मारक के राज्य स्तरीय कार्यक्रम से श्रवण किया। कार्यक्रम में वंदे मातरम् गीत की 120 साल प्राचीन दुर्लभ रिकॉर्डिंग प्रसारित की गई। इस अवसर पर हार्मनी ग्रुप के 150 कलाकारों ने वंदे मातरम् गीत के मूल स्वरूप के साथ ही तमिल, मलयालम तथा अन्य भारतीय भाषाओं में सांगीतिक प्रस्तुति दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर उपस्थित जन समुदाय को स्वदेशी की शपथ दिलाई।