भोपाल (22 जुलाई 24)। प्रदेश में वृहद इकाइयों की स्थापना के लिए 17 हजार करोड़ रूपए के निवेश प्रस्ताव और एमएसएमई इकाइयों की ओर से प्राप्त 5 हजार करोड़ रूपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इस तरह जबलपुर के रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव में छोटे-बड़े उद्योगों की ओर से कुल 22 हजार करोड़ रूपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग की भूमिका से इस माह इनमें निरंतर वृद्धि भी होगी। इसके लिए प्रमुख उद्योगपतियों से संवाद का सिलसिला निरंतर जारी है। जबलपुर आरईसी में सबसे बड़ा निवेश प्रस्ताव रक्षा उपकरण निर्माण से संबंधित 600 करोड़ रूपए का है। इसके अंतर्गत अशोक लीलैंड एवं आर्मर्ड व्हीकल निगम लिमिटेड के बीच करारनामा भी हो गया है। यह प्रस्ताव मध्यप्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्षेत्रीय स्तर पर उद्योगों के विकास की ठोस पहल की है। इसके लिए के नवीन मंत्र का उपयोग प्रभावी तरीके से प्रारंभ किया गया है। गत मार्च माह में उज्जैन में सम्पन्न रीजनल कॉन्क्लेव के बाद महाकौशल अंचल के प्रमुख नगर और औद्योगिक केन्द्र जबलपुर में हुई कॉन्क्लेव अनेक अर्थ में महत्वपूर्ण रही। कॉन्क्लेव से जहां प्रदेश में 67 नई औद्योगिक इकाइयों के लोकार्पण और भूमिपूजन सम्पन्न हुए, वहीं 265 औद्योगिक इकाइयों को 340 एकड़ भूमि आवंटित की गई। नई इकाइयों से प्रदेश में 16 हजार 500 से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। कुल 332 इकाइयों द्वारा 3330 करोड़ रूपए का नया निवेश आ रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के सभी अंचलों में आरईसी के आयोजन के निर्देश दिए थे। आगामी माहो में प्रदेश के अन्य बड़े नगरों में भी रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित करने की योजना है। इनमें सागर, रीवा और ग्वालियर शामिल हैं। इससे बुंदेलखंड, विंध्य और चम्बल क्षेत्र में स्थानीय उद्यमियों को निवेश के लिए प्रोत्साहित करने में मदद मिलेगी। प्रदेश में हो रही रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव बहुआयामी गतिविधियों के कारण उद्योगों के विकास का आधार बन रही हैं। ये कॉन्क्लेव जहां बायर- सेलर मीट के माध्यम से महत्वपूर्ण मंच सिद्ध होती हैं, वहीं वृहद औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव और प्रमुख उद्योगपतियों के बीच वन-टू-वन बैठकें मील का पत्थर का साबित होंगी।