लखनऊ (24 जून 26)। समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बुधवार को अयोध्या दान मामले में अभी तक प्राथमिकी दर्ज न होने को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि उसके बिना एसआईटी 'बिना तीर की कमान' है। उन्होंने कहा कि एसआईटी का मतलब 'शेयर इन थेफ्ट' यानी चोरी में हिस्सेदारी है। यादव ने यहां पार्टी मुख्यालय में प्रेसवार्ता में कहा, 'यह घोर पाप है और आस्था के साथ छेड़छाड़ की गई है। यह चढ़ावा पूरे राज्य और देश का था और योगदान अंतरराष्ट्रीय स्तर से भी आया था। यह बहुत संवेदनशील मुद्दा है।'
इस मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच के उद्देश्य पर सवाल उठाते हुए, यादव ने कहा, 'एसआईटी का क्या मतलब है? क्या इसका मतलब चोरी में हिस्सा है या कुछ और? क्या हमें इसे 'चोरी में हिस्सेदारी' या 'सेंध (विश्वास में सेंध)' कहना चाहिए?' उन्होंने कहा कि एसआईटी का मतलब 'शेयर इन थेफ्ट' मतलब चोरी में हिस्सेदारी है। उन्होंने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं ने राम मंदिर का दर्शन कर दान दिया था। उन्होंने कहा, 'प्रदेश के हर लोकसभा क्षेत्र से अगर 10 करोड़ रुपये भी मानें तो 800 करोड़ रुपये का चढ़ावा प्रभु श्रीराम को चढ़ाया गया है। लोग गुप्तदान भी करते हैं। अब गुप्तदान करने वाले अगर बोलेंगे तो उनके घर ईडी और सीबीआई पहुंच जाएगी।' इसके पहले यादव ने 'एक्स' पर कहा, 'प्राथमिकी के बिना एसआईटी 'बिना तीर की कमान' है।
उन्होंने कहा, 'जिस तरह हर दिन 'चढ़ावा-चंदा-दान' चोरी का नया भंडाफोड़ हो रहा है और सनातनी आस्थावानों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है, उसे देखकर नेपाल और बाक़ी बार्डर बंद कर देने चाहिए, जिससे आरोपी फ़रार न हो सकें।' यादव ने कहा, 'जब अभी खुलासे हो ही रहे हैं तो एसआईटी की जांच क्या हासिल कर लेगी । ख़ासतौर से तब जब यह 'जांच' से ज़्यादा 'ढाँक' के लिए बनी है या फिर 'बांट' के लिए।' लखनऊ के अग्निकांड की चर्चा करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि यह घटना कोई नियमित दुर्घटना नहीं थी, यह सरकार और प्रशासन की विफलताओं को दर्शाती है। उन्होंने कहा, 'अगर पुलिस, प्रशासन और सरकार ने समय रहते सुरक्षा मानदंडों का अनुपालन सुनिश्चित किया होता, तो वहां जान गंवाने वाले अधिकांश बच्चों और अन्य लोगों को बचाया जा सकता था।'