मुंबई (10 अक्टूबर 24)। देश के मशहूर उद्योगपति और टाटा संस के चेयरमैन रतन टाटा का निधन देर रात बुधवार को हो गया। इस खबर ने पूरे देश को झकझोर कर दिया है। वे पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे और अक्सर इलाज के लिए अस्पताल जाया करते थे। 9 अक्टूबर को रात 11:30 बजे दक्षिण मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उनका निधन हो गया। उनके निधन से देश में शोक की लहर फैल गई है। जिसके बाद आज उनके पार्थिक शरीर को भारतीय राष्ट्रीय ध्वज में लपेटकर नरीमन पॉइंट स्थित नेशनल सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स (एनसीपीए) के लॉन में रखा गया। यहां पर लोगों ने उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दी।
रतन टाटा की श्रद्धांजलि सभा में विभिन्न धर्मों के पुजारी एक साथ आए। इस समारोह में पारसी, मुस्लिम, ईसाई, सिख और हिंदू धर्म के पुजारियों ने मिलकर प्रार्थना की। यह दृश्य सच्चे भारत की झलक पेश करता है, जहां सभी धर्मों के लोग एकत्र होकर एक ही उद्देश्य के लिए प्रार्थना कर रहे थे। इस विविधता में एकता का संदेश समाज को जोड़ने का काम करता है। इस प्रकार की एकजुटता हमें यह सिखाती है कि मानवता और सम्मान का धर्म सभी से बड़ा होता है। रतन टाटा ने जीवन भर इस एकता का संदेश फैलाया, और उनकी याद में आयोजित यह प्रार्थना सभा उस मूल्य को दर्शाती है।
प्रार्थना सभा के वीडियो को देखकर कई लोगों ने अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। एक व्यक्ति ने कहा, 'हमने एक रत्न खो दिया।' जबकि दूसरे ने लिखा, 'ऐसा लग रहा है जैसे व्यक्तिगत छति हुई है।' कई लोगों ने यह भी कहा कि रतन टाटा ने सभी को एक साथ लाने का कार्य किया और उनकी आत्मा को शांति मिले। रतन टाटा का निधन केवल एक उद्योगपति का नहीं, बल्कि एक ऐसे इंसान का निधन है जिसने समाज के विभिन्न वर्गों को एक साथ लाने का प्रयास किया। उनकी विरासत हमेशा जीवित रहेगी।