पुणे (09 अक्टूबर 26)। मराठी और हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में गोवा स्थित उनके आवास पर दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। ज़िंदगी को अपनी शर्तों पर जीने वाले नाना अपनी मौत को लेकर भी बेहद बेबाक थे। साल 2023 में अपनी फिल्म 'द वैक्सीन वॉर' के प्रचार के दौरान उन्होंने हंसते-हंसते अपनी मौत और अंतिम संस्कार से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा साझा किया था।
सितंबर 2023 में दिए एक इंटरव्यू में नाना पाटेकर ने कहा था कि वे मौत को जीवन का एक स्वाभाविक सच मानते हैं और जानते हैं कि एक न एक दिन सबको जाना ही है।अपनी अंतिम यात्रा की तैयारी का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया था, 'मैंने अपने लिए 12 मन सूखी लकड़ियां पहले से ही संभालकर रखी हैं। मैंने साफ कह दिया है कि मुझे उसी में जलाना, किसी भी हाल में गीली लकड़ी का इस्तेमाल मत करना।' जब उनसे इसकी वजह पूछी गई, तो उन्होंने अपने चिरपरिचित मज़ाकिया अंदाज में कहा था कि गीली लकड़ी के इस्तेमाल से धुआं निकलेगा और अंतिम संस्कार में शामिल दोस्तों और लोगों की आंखों से पानी (आंसू) आने लगेगा। नाना ने कहा था, 'मरते वक्त कम से कम मुझे यह गलतफहमी तो नहीं होनी चाहिए कि लोग मेरे जाने पर रो रहे हैं।' निधन से महज चार दिन पहले गोवा के एक कार्यक्रम में उन्होंने जीवन की अनिश्चितता पर बात करते हुए कहा था, 'आज मैं यहां हूं, कल का क्या पता।'
महाराष्ट्र सरकार ने भारतीय सिनेमा और रंगमंच में नाना पाटेकर के अतुलनीय योगदान को देखते हुए उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ करने का ऐलान किया है। उनके पार्थिव शरीर को पुणे के पास स्थित 'डोंजे' फार्महाउस पर ले जाया जाएगा, जहां उनके प्रिय स्थान पर उनका अंतिम संस्कार संपन्न होगा। तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और पद्म श्री से सम्मानित नाना ने अपने जीवन को सिर्फ अभिनय तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ मिलकर 'नाम फाउंडेशन' की स्थापना की, जिसके माध्यम से उन्होंने महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त किसानों और उनके परिवारों की ऐतिहासिक मदद की।