प्रयागराज (03 फरवरी 25)। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज महाकुंभ में इस बार 220 लोगों ने संन्यास लेकर नागा संन्यासी बनने का निर्णय लिया है। जूना अखाड़ा ने 200 पुरुष और 20 महिलाओं को विधि-विधान के साथ संन्यास दिलाया है। इन लोगों ने पिंडदान और विजया हवन कर अपने जीवन को सनातन धर्म के प्रति समर्पित कर दिया।
जानकारी के मुताबिक, संन्यास लेने वालों में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और बिहार की महिलाएं और पुरुष शामिल हैं। अब तक जूना अखाड़ा में कुल 4500 नागा संन्यासी और 2150 संन्यासिनी बनाई जा चुकी हैं। जो लोग संन्यास नहीं ले पाए थे, उन्हें शनिवार को विशेष संन्यास दिया गया। सभी नए संन्यासियों को सेक्टर 20 के गंगा घाट पर 108 बार मंत्रोच्चार करवाकर स्नान कराया गया। स्नान के बाद उन्होंने पिंडदान किया और परिवार से संपर्क खत्म कर स्वयं को मृत घोषित किया। दशनामी संन्यासिनी अखाड़ा की अध्यक्ष डॉ. देव्या गिरि ने बताया कि सभी नागा संन्यासी और संन्यासिनी वसंत पंचमी के अमृत स्नान पर्व में शामिल होंगे। नए संन्यासियों को आध्यात्मिक जीवन के लिए स्वयं को जप-तप में लीन करना होगा। इस दौरान उन्हें अमृत स्नान कराते समय अखाड़े के शिविर में रहना होगा। स्नान के बाद, वे सभी अखाड़े का हिस्सा बन जाएंगे।