Wednesday, 30 Sep 2026

महाकुंभ 2025: 66 करोड़ श्रद्धालुओं का संगम

प्रयागराज (27 फरवरी 25)। प्रयागराज महाकुंभ 2025 में महाशिवरात्रि के दिन अंतिम शाही स्नान हुआ। यह महाकुंभ 13 जनवरी से 26 फरवरी तक 45 दिनों तक चला और इस दौरान 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में पवित्र डुबकी लगाई। इस विशाल धार्मिक आयोजन में देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालुओं ने अपनी आस्था और भक्ति का प्रदर्शन किया। महाकुंभ में कुल छह शाही स्नान हुए। इन स्नानों के दिन विशेष धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व रखते हैं। शाही स्नान के दिन श्रद्धालुओं का जमावड़ा बहुत अधिक होता है। वे इन दिनों को बहुत ही शुभ मानते हैं। इसमें 

13 जनवरी को पहला शाही स्नान,14 जनवरी को मकर संक्रांति स्नान, 29 जनवरी को मौनी अमावस्या स्नान, 2 फरवरी को बसंत पंचमी स्नान, 12 फरवरी को माघ पूर्णिमा स्नान और 26 फरवरी को महाशिवरात्रि पर अंतिम शाही स्नान हुआ। 

इन स्नानों में श्रद्धालु संगम में डुबकी लगाकर पुण्य प्राप्त करने की कामना करते हैं। महाकुंभ का आयोजन हर 12 साल में होता है और यह समुद्र मंथन से जुड़ी एक पौराणिक कथा से संबंधित है। कहा जाता है कि जब देवता और असुरों ने समुद्र मंथन किया था, तो अमृत कलश से कुछ बूंदें हरिद्वार, उज्जैन, प्रयागराज और नासिक में गिरी थीं। इन स्थानों पर महाकुंभ का आयोजन होता है, और श्रद्धालु इन स्थानों पर आकर इन अमृत बूंदों से पुण्य प्राप्त करने के लिए स्नान करते हैं। महाकुंभ 2025 में पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग किया गया। यूपी सरकार ने 500 से अधिक एआई कैमरों के जरिए श्रद्धालुओं की संख्या का आंकलन किया। इन कैमरों में भीड़ घनत्व, हेड काउंट और फेस रिकग्निशन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया। इससे प्रशासन को महाकुंभ में श्रद्धालुओं की संख्या पर नजर रखने में मदद मिली और यह सुनिश्चित किया गया कि हर श्रद्धालु को सही तरीके से व्यवस्था मिल सके। महाकुंभ में इस बार 4000 हेक्टेयर (15,812 बीघा) का क्षेत्रफल शामिल था और इसे 25 सेक्टरों में बांटा गया था। संगम तट पर कुल 41 स्नान घाट बनाए गए थे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 102 पार्किंग स्थल, 7 प्रवेश मार्ग और 24 सैटेलाइट पार्किंग की व्यवस्था की गई थी। संगम नोज, जहां गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का संगम होता है, इस बार और भी बड़ा किया गया। आईआईटी गुवाहाटी के विशेषज्ञों की मदद से यहां 2 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र का विकास किया गया, जिसमें 630 गाड़ियां पार्क हो सकती थीं। यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए एक प्रमुख आकर्षण बन गया था।


Tags:

Follow us

This question is not available..!