गुना (06 अक्टूबर 26)। महाकाल की नगरी उज्जैन से प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या जन्मभूमि तक ‘सनातन स्वाभिमान पदयात्रा’ का संकल्प अब आकार लेने जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की इस यात्रा को लेकर यात्रा प्रभारी सचिन वत्स ने रूट की जानकारी साझा की है। यात्रा उज्जैन से शुरू होकर विभिन्न पड़ावों से गुजरते हुए अयोध्या पहुंचेगी।
20 अक्टूबर को विजयादशमी के दिन उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से शुरू होने वाली यह यात्रा तराना, शाजापुर, सारंगपुर, खुजनेर, राजगढ़, चाचौड़ा, आरोन, अशोकनगर, चंदेरी, तालबेहट, जेरोन, ओरछा जिला निवाड़ी, चिरगांव, उरई, कालपी, कानपुर देहात, लखनऊ देहात, बाराबंकी होते हुए 930 किलोमीटर का सफर तय करते हुए अयोध्या में रामलला के दर्शन के साथ समाप्त होगी। यह महज एक पदयात्रा नहीं, बल्कि महाकाल की नगरी से श्रीराम की नगरी तक सनातन की उस आत्मा को तलाशने का प्रयास है, जिसमें आस्था के साथ सत्य, सेवा, करुणा, समरसता और हर व्यक्ति के सम्मान की भावना निहित है। यात्रा के जरिए सनातन को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच उसके सामाजिक और मानवीय पक्ष को भी सामने रखने का प्रयास किया जाएगा। यात्रा प्रभारी सचिन वत्स के मुताबिक, यात्रा का उद्देश्य यह संदेश देना है कि सनातन केवल पूजा-पद्धति या धार्मिक पहचान का विषय नहीं, बल्कि वह जीवन-दर्शन है जिसमें कमजोर से कमजोर व्यक्ति के सम्मान और अधिकार की भी जगह है।
उज्जैन से निकलने वाली यह यात्रा बाबा महाकाल की नगरी की आध्यात्मिक ऊर्जा को साथ लेकर आगे बढ़ेगी और अंततः अयोध्या में प्रभु श्रीराम की नगरी तक मर्यादा के साथ पहुंचेगी। रास्ते में लोगों से संवाद, जनसरोकारों के मुद्दों पर चर्चा और सनातन के मूल मूल्यों को लेकर संदेश दिया जाएगा। उज्जैन से अयोध्या तक का यह सफर सिर्फ किलोमीटर में नहीं मापा जाएगा। एक ओर महाकाल की नगरी होगी, दूसरी ओर श्रीराम की जन्मभूमि; बीच में होंगे गांव, कस्बे, आम लोग और उनके अपने सवाल। यही इस यात्रा को एक भावनात्मक और वैचारिक यात्रा का स्वरूप देता है। दिग्विजय सिंह की यह यात्रा ऐसे समय में सामने आ रही है, जब देश में सनातन, धर्म और राजनीति को लेकर लगातार बहस जारी है। ऐसे में ‘सनातन स्वाभिमान’ के जरिए यह सवाल भी उठाया जाएगा कि सनातन की पहचान केवल नारों में है या फिर वह समाज के अंतिम व्यक्ति के सम्मान, समानता और न्याय में भी दिखाई देनी चाहिए। बाबा महाकाल के आशीर्वाद से शुरू होकर प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या तक पहुंचने वाला यह सफर आखिरकार उसी सवाल की तलाश होगा। सनातन का स्वाभिमान क्या केवल आस्था में है, या उस आस्था से जुड़े हर इंसान के सम्मान में भी।