Tuesday, 06 Oct 2026

मशहूर शायर डॉ.बशीर बद्र का निधन

भोपाल (28 मई 26)। उर्दू शायरी और गजल की दुनिया से बेहद ही दुःख खबर सामने आई है। आपको बता दें कि मशहूर शायर और और पद्मश्री से सम्मानित डॉ. बशीर बद्र का निधन हो गया। 91 की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली और उनके निधन की खबर सुनते ही उनके प्रेमियों में शोक की लहर फ़ैल गई है। देश-विदेश में उनकी काफी लोकप्रियता है और दूर-दूर से लोग उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर उनकी खबर फैलते ही हर कोई दुखी हो गया है। 

आपको बता दें कि अपनी शायरी से लोगों को अपना दीवाना बनाने वाले बशीर बद्र का जन्म 15 फरवरी 1935 को उत्तर प्रदेश के अयोध्या में हुआ था। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से उन्होंने पढ़ाई पूरी की और इसके बाद पीएचडी की। इसके बाद वो उर्दू के प्रोफेसर के रूप में काम किया। बशीर बद्र की शायरियां इतनी फेमस थी की हर एक लाइन में मोहब्बत, दर्द, रिश्ता देखने को मिलता था। उनकी गजलें आम नहीं थी बल्कि बहुत से अर्थ समेटे हुए थीं। आज चाहे उन्होंने दुनियां को अलविदा कह दिया है लेकिन उनकी शायरियां हमेशा लोगों के दिलों में जिन्दा रहेंगी। बशीर बद्र की जिंदगी बहुत ही कठिनाइयों से भरी हुई थी। साल 1987 में मेरठ में हुए सांप्रदायिक दंगों में उनका घर जलकर राख हो गया था। इतना ही नहीं इसी हादसे में उनकी बहुत सी रचनाएं जल कर राख हो गईं। इसके बाद से ही उन्होंने मेरठ को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया और भोपाल में आकर अपनी जिंदगी शुरू की। 

बशीर बद्र की शायरी का प्रभाव केवल साहित्य तक ही सीमित नहीं था, बल्कि इसका असर राजनीतिक और ऐतिहासिक मंचों तक भी देखा गया। बताया जाता है कि 1972 के शिमला समझौते के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति जुल्फिकार अली भुट्टो को उनका एक प्रसिद्ध शेर सुनाया था। इससे यह साफ झलकता है कि उनकी रचनाएँ कितनी गहरी, प्रभावशाली और सोच को छू लेने वाली थीं।

Tags:

Follow us

This question is not available..!