Sunday, 27 Sep 2026

भेड़ाघाट में बनेगा जियोलॉजिकल पार्क व म्यूजियम

जबलपुर (27 सितंबर 26)। जबलपुर के विश्व प्रसिद्ध भेड़ाघाट-लम्हेटाघाट में देश का पहला विश्वस्तरीय जियोलॉजिकल म्यूजियम तथा पर्यटक सुविधाएं विकसित करने की 87 करोड़ रूपये की परियोजना को केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। परियोजना स्वदेश दर्शन 2.0 योजना के तहत मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के माध्यम से लगभग 12 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित की जाएगी।

यह स्वीकृति लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह की करीब ढाई वर्षों से जारी सतत पहल का परिणाम है। सिंह ने परियोजना की परिकल्पना को ठोस स्वरूप देने, प्रस्ताव तैयार कराने, संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने और केंद्र सरकार से स्वीकृति दिलाने के लिए निरंतर प्रयास किए। परियोजना की मंजूरी से जबलपुर के पर्यटन विकास को नई गति मिलेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार तथा व्यापार के अवसर बढ़ेंगे। लोक निर्माण मंत्री ने 18 जनवरी 2024 को मंत्रालय में जियो पार्क की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और डिजाइन का प्रस्तुतिकरण देखा था। उन्होंने परियोजना के प्रत्येक निर्माण को प्राकृतिक परिवेश के अनुरूप रखने, संग्रहालय को आकर्षक और शिक्षाप्रद बनाने तथा लम्हेटा फॉर्मेशन, रानी दुर्गावती और जबलपुर की भू-संस्कृति को इसमें प्रमुखता से शामिल करने के निर्देश दिए थे। उन्होंने प्रकृति अनुभव आधारित पर्यटन, नेचर स्टे और स्थानीय समुदाय की भागीदारी को भी परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने पर जोर दिया था।

मंत्री सिंह ने कहा कि भेड़ाघाट जबलपुर के साथ पूरे मध्यप्रदेश की पहचान है। यहां की संगमरमर की चट्टानें, धुआंधार जलप्रपात और नर्मदा नदी देश-दुनिया के पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। जियोलॉजिकल पार्क और म्यूजियम इस पहचान को नया विस्तार देगा। परियोजना में लगभग 5,745 वर्गमीटर निर्मित क्षेत्र प्रस्तावित है, जबकि 90 प्रतिशत या उससे अधिक क्षेत्र को हरित रखने का लक्ष्य है।  परियोजना के अंतर्गत विश्वस्तरीय जियोलॉजिकल म्यूजियम एवं इंटरप्रिटेशन सेंटर, छह विषयगत गैलरियां, 130 से अधिक प्रदर्श, 3डी मॉडलिंग, इंटरैक्टिव टच टेबल, डिजिटल पैनल, इमर्सिव थिएटर, टाइटेनोसॉर स्क्वायर, डायनासोर पार्क, फॉसिल गार्डन, जियोलॉजिकल मेज, रॉक गार्डन, ट्री-टॉप वॉकवे, ग्लास फ्लोर, नेचर वॉक और व्यूइंग डेक विकसित किए जाएंगे। परिसर में रेस्टोरेंट, फूड कोर्ट, म्यूजियम शॉप, स्थानीय उत्पादों के लिए रिटेल क्षेत्र, ग्लैम्पिंग टेंट आधारित इको-रिसॉर्ट, पार्किंग और टिकटिंग सहित आधुनिक पर्यटक सुविधाएं भी रहेंगी। संग्रहालय में बच्चों, विद्यार्थियों और भू-विज्ञान के शोधार्थियों के लिए अलग-अलग अनुभव आधारित सामग्री उपलब्ध होगी। परियोजना की क्रियान्वयन एजेंसी मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड होगी। परियोजना को 18 माह में, सितंबर 2026 से फरवरी 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना के लिए पर्यटन विभाग के स्वामित्व में लगभग 12 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध है।




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