वाशिंगटन (28 मई 26)। अमेरिका की पूर्व वरिष्ठ अधिकारी और व्हाइट हाउस की पूर्व सलाहकार लिसा कर्टिस ने भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबिओ की हालिया भारत यात्रा ने दोनों देशों के बीच बिगड़ते रिश्तों को कुछ हद तक संभाला जरूर, लेकिन यह केवल 'बैंड-एड' यानी अस्थायी मरहम जैसा कदम था। कर्टिस के मुताबिक, रिश्तों में असली सुधार तभी संभव है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद भारत को प्राथमिकता देने का स्पष्ट संदेश दें।
लिसा कर्टिस, जो 2017 से 2021 तक व्हाइट हाउस में दक्षिण और मध्य एशिया मामलों की वरिष्ठ निदेशक रह चुकी हैं, ने कहा कि भारत में यह धारणा मजबूत हो रही है कि ट्रंप का दूसरा कार्यकाल पहले जैसा भारत-केंद्रित नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में कई ऐसे फैसले हुए जिनसे भारत असहज महसूस कर रहा है, जैसे-अमेरिकी टैरिफ नीतियां, इमिग्रेशन पर सख्ती, पाकिस्तान के साथ बढ़ती अमेरिकी नजदीकियां और चीन के प्रति नरम रुख। कर्टिस ने कहा कि ये सभी बातें भारतीय रणनीतिक सोच पर असर डाल रही हैं। पूर्व अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि हाल में ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई मुलाकात के बाद भारत को लगने लगा है कि अमेरिका अब चीन के साथ टकराव की जगह व्यापारिक रिश्तों को ज्यादा महत्व दे रहा है। लिसा कर्टिस ने कहा कि अगर ट्रंप भारत यात्रा करते हैं या सार्वजनिक रूप से यह कहते हैं कि भारत अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति का केंद्रीय साझेदार है, तो इससे दोनों देशों के रिश्तों में नया भरोसा पैदा होगा।