Monday, 28 Sep 2026

ब्रिक्स संस्कृति सम्मेलन में अपनाया भोपाल घोषणा पत्र

भोपाल (11 अगस्त 26)। 11वीं ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक और ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह के सम्मेलनों का भोपाल में सफल समापन हो चुका है। 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' की शाश्वत भारतीय भावना और भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की मुख्य थीम 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण'  के संकल्प के साथ आयोजित इस तीन दिवसीय वैश्विक समागम ने अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति और सांस्कृतिक सहयोग का एक नया इतिहास रच दिया है। कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में संपन्न हुए इस बहुपक्षीय सम्मेलन ने साबित किया कि जब वैश्विक स्तर पर संस्कृति, परंपरा और रचनात्मकता आपस में जुड़ती हैं, तो वे भौगोलिक सीमाओं से परे शांति, परस्पर सम्मान और समावेशी विकास का एक स्थायी ढांचा तैयार करती हैं।

इस ऐतिहासिक आयोजन की पूर्व संध्या से लेकर समापन तक, भोपाल की धरा पर वैश्विक सहयोग का एक अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला। सम्मेलन में भारत सहित कुल 14 देशों के 55 उच्चस्तरीय प्रतिनिधि शामिल हुए। इनमें 10 ब्रिक्स सदस्य देश- ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात के साथ चार साझेदार देश बेलारूस, क्यूबा, कजाकिस्तान और थाईलैंड शामिल हुए। सम्मेलन की भव्यता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात के संस्कृति मंत्रियों ने स्वयं भोपाल पहुंचकर इस विचार-विमर्श का नेतृत्व किया, जबकि मिस्र के संस्कृति मंत्री ने ऑनलाइन माध्यम से अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।

यह आयोजन भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत संस्कृति क्षेत्र के अंतर्गत अपनाई गई एक अत्यंत सुव्यवस्थित और चरणबद्ध प्रक्रिया की ऐतिहासिक परिणति रहा। इस यात्रा की शुरुआत 29–30 अप्रैल 2026 को वर्चुअल माध्यम से आयोजित पहली ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की बैठक से हुई थी। इसके पश्चात 4-5 जून को सांस्कृतिक नगरी वाराणसी में दूसरी कार्य समूह की बैठक आयोजित हुई, जिसमें नीतिगत प्राथमिकताओं का खाका खींचा गया। 5-6 अगस्त को भोपाल में संपन्न हुई तीसरी कार्य समूह की बैठक ने मंत्री-स्तरीय वार्ताओं का आधार तैयार किया। इन गहन और बहुस्तरीय विचार-विमर्शों का सफल समापन 8 अगस्त 2026 को 11वीं ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक और सर्वसम्मति से 'भोपाल घोषणा पत्र' को अंगीकार किए जाने के साथ हुआ। भोपाल सम्मेलन की दूरगामी और ऐतिहासिक सफलताओं में से एक भारत द्वारा प्रस्तुत 'स्वैच्छिक कलाकार रजिस्ट्री' का प्रस्ताव रहा, जिसे सभी सहभागी देशों ने सर्वसम्मति से स्वीकार किया। भारत द्वारा शुरू की गई यह पायलट पहल एक 'साझा ब्रिक्स डिजिटल प्लेटफॉर्म' के रूप में आकार लेगी। 

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