Wednesday, 30 Sep 2026

बलूचों की आवाज बनी 14 साल की लड़की फराह

क्वेटा (29 सितंबर 26)। पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान में मानवाधिकार और स्थानीय लोगों के अधिकारों को लेकर आवाज उठाने वाली 14 वर्षीय कार्यकर्ता फराह बलोच ने भारत और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बलूचिस्तान के लोगों के समर्थन में आवाज उठाने की अपील की है। अपनी मां के साथ जारी वीडियो संदेश में फराह ने भारतीय नागरिकों से क्षेत्र के लोगों की आवाज बनने का आग्रह किया। फराह बलोच ने अपने संदेश में कहा, 'आज मैं, फराह बलोच, अपनी मां के साथ बलूचिस्तान की बेटी के रूप में प्रत्येक नागरिक से हमारी आवाज बनने और बलूचिस्तान के लोगों का समर्थन करने की अपील करती हूं।' भारत को सीधे संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि 'हिंदुस्तान, आपकी आवाज और बलूचिस्तान के आवाजविहीन लोगों के लिए आपका समर्थन बहुत मायने रखता है।'

बलूचिस्तान पाकिस्तान का क्षेत्रफल के लिहाज से सबसे बड़ा प्रांत है। यह गैस, सोना और तांबा जैसे प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध माना जाता है, लेकिन लंबे समय से यहां आर्थिक पिछड़ेपन, संसाधनों के बंटवारे और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर असंतोष की स्थिति बनी हुई है। बलूच कार्यकर्ता और संगठन पाकिस्तान के सुरक्षा बलों पर जबरन गायब किए जाने, मानवाधिकार उल्लंघन और राजनीतिक असहमति को दबाने जैसे गंभीर आरोप लगाते रहे हैं। पाकिस्तान सरकार और उसके सुरक्षा प्रतिष्ठान इन आरोपों को अलग-अलग मामलों में खारिज करते रहे हैं। बलूचिस्तान में अलगाववादी संगठनों की हिंसक गतिविधियां भी लंबे समय से जारी हैं। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी समेत विभिन्न सशस्त्र संगठन पाकिस्तान से अधिक स्वायत्तता या स्वतंत्रता की मांग करते रहे हैं। इन संगठनों की ओर से सुरक्षा बलों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर हमले भी किए जाते रहे हैं। बलूचिस्तान में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा और ग्वादर बंदरगाह जैसी बड़ी परियोजनाएं भी स्थानीय असंतोष का विषय रही हैं। बलूच कार्यकर्ताओं का आरोप है कि इन परियोजनाओं से स्थानीय लोगों को अपेक्षित आर्थिक लाभ नहीं मिल रहा और उनकी जमीन तथा प्राकृतिक संसाधनों पर बाहरी नियंत्रण बढ़ रहा है।दूसरी ओर पाकिस्तान और चीन इन परियोजनाओं को क्षेत्र के आर्थिक विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण बताते हैं।

फराह बलोच की अपील ऐसे समय आई है जब बलूचिस्तान की स्थिति को लेकर मानवाधिकार कार्यकर्ता अंतरराष्ट्रीय मंचों और सामाजिक माध्यमों पर लगातार आवाज उठा रहे हैं। फराह ने अपने वीडियो संदेश में आम भारतीय नागरिकों से भी बलूचिस्तान के लोगों की परेशानियों को दुनिया के सामने रखने का आग्रह किया।उनकी अपील का केंद्र बलूचिस्तान में कथित मानवाधिकार उल्लंघन, राजनीतिक दमन और स्थानीय लोगों की समस्याओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने लाना है। उन्होंने कहा कि आम लोगों की आवाज और समर्थन इस संघर्ष को दुनिया तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। भारत ने अतीत में बलूचिस्तान में मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर पाकिस्तान की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2016 में स्वतंत्रता दिवस के भाषण में बलूचिस्तान का उल्लेख भी किया था। हालांकि, भारत का आधिकारिक रुख व्यापक भारत-पाकिस्तान कूटनीतिक संबंधों के संदर्भ में सावधानीपूर्ण रहा है। फराह बलोच ने अपनी अपील के जरिए अब इस मुद्दे को भारतीय नागरिकों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच उठाने की कोशिश की है।  

Tags:

Follow us

This question is not available..!