नईदिल्ली (19 जून 24)। भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय (पीएसए का कार्यालय) ने यूरोपीय आयोग के संयुक्त अनुसंधान केंद्र (ईसी- जेआरसी) के साथ संयुक्त रूप से ऑनलाइन मोड में प्रौद्योगिकी दूरदर्शिता पर ज्ञान विनिमय कार्यक्रम की मेजबानी की। विभिन्न विशेषज्ञता वाले कुल 46 डोमेन विशेषज्ञ ज्ञान विनिमय कार्यक्रम में शामिल हुए। सत्र का उद्देश्य भारत और ईसी- जेआरसी के प्रौद्योगिकी दूरदर्शिता समुदायों के विशेषज्ञों, विद्वानों और कार्यरत लोगों को आपसी ज्ञान प्राप्ति और ज्ञान-निर्माण के लिए एक साथ लाना था। इस श्रृंखला के पहले सत्र में दूरदर्शिता अभ्यासों में उपयोग किए जाने वाले पद्धतिगत दृष्टिकोणों पर ध्यान केंद्रित किया गया।
पीएसए कार्यालय की वैज्ञानिक सचिव डॉ. परविंदर मैनी ने अपने उद्घाटन भाषण में विज्ञान संबंधी सलाह प्रदान करने में कार्यालय द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। डॉ. मैनी ने नीतिगत कार्यों में प्रौद्योगिकी दूरदर्शिता की बहुविषयक प्रकृति के महत्व पर भी विचार व्यक्त किये। उन्होंने प्रौद्योगिकी दूरदर्शिता पर एक टास्कफोर्स के गठन सहित दूरदर्शिता गतिविधियों में घरेलू आंतरिक (इन-हाउस) क्षमताओं को मजबूत करने के लिए कार्यालय में किए गए प्रयासों के बारे में बात की। भारत में यूरोपीय संघ के प्रतिनिधिमंडल के राजदूत महामहिम श्री हर्वे डेल्फिन ने अपने उद्घाटन भाषण में यह बताया कि कैसे भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रौद्योगिकी दूरदर्शिता गतिविधियों पर ज्ञान का आदान-प्रदान प्रभावशाली संयुक्त पहलों के साथ मौजूदा द्विपक्षीय जुड़ाव को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में योगदान देगा।