ओस्लो (07 जून 26)। भारतीय ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानानंदा ने वैश्विक शतरंज की दुनिया में एक नया इतिहास रच दिया है। उन्होंने सबसे कड़े और प्रतिष्ठित टूर्नामेंटों में से एक 'नार्वे शतरंज' का खिताब अपने नाम कर लिया है। वह इस महामुकाबले को जीतने वाले देश के पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। अंतिम दौर (लास्ट राउंड) के करो या मरो के मुकाबले में चेन्नई के इस 20 वर्षीय युवा खिलाड़ी ने जर्मनी के दिग्गज विन्सेंट कीमर को क्लासिकल बाजी में मात देकर पूरे 3 अंक बटोरे और एलीट शतरंज की सबसे चमचमाती ट्रॉफी अपने नाम कर ली। प्रज्ञानानंदा ने आखिरी दिन की शुरुआत 15 अंक के साथ तीसरे स्थान से की।
प्रज्ञानानंदा ने सबसे अहम मौके पर बेहतरीन खेल दिखाया और क्लासिकल बाजी में जीत हासिल करके पूरे तीन अंक बटोरे। इस तरह वे 18 अंक पर पहुंचे और एलीट शतरंज की सबसे प्रतिष्ठित ट्रॉफियों में से एक अपने नाम की। चेन्नई के इस 20 वर्षीय खिलाड़ी ने वह उपलब्धि हासिल की जो 2013 में टूर्नामेंट की शुरुआत के बाद से भारतीय शतरंज के दिग्गज विश्वनाथन आनंद और मौजूदा विश्व चैंपियन डी गुकेश जैसे खिलाड़ी भी हासिल नहीं कर पाए थे। नार्वे शतरंज में दूसरी बार हिस्सा ले रहे प्रज्ञानानंदा की शुरुआत धीमी रही थी लेकिन टूर्नामेंट के दूसरे हाफ में उन्होंने रफ्तार पकड़ी और लगातार चार जीत हासिल की। प्रज्ञानानंदा के अभियान की सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने नार्वे शतरंज के सात बार के चैंपियन और दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को क्लासिकल बाजी में दो बार हराया। मौजूदा विश्व चैंपियन गुकेश के अंतिम चरण में खिताब की दौड़ से बाहर होने के बाद प्रज्ञानानंदा ने भारत की उम्मीदों को जीवंत रखा और आखिरकार खिताब अपने नाम किया। अमेरिकी ग्रैंडमास्टर वेस्ली सो आखिरी दौर से पहले 15.5 अंक के साथ सबसे आगे थे लेकिन अलीरेजा फिरोजा के खिलाफ उनकी क्लासिकल बाजी ड्रॉ रही जिससे मुकाबला आर्मागेडन टाईब्रेक में चला गया। इस नतीजे ने प्रज्ञानानंदा के लिए रास्ता खोल दिया। उन्हें पता था कि कीमर के खिलाफ क्लासिकल बाजी में जीत उन्हें अंक तालिका में सबसे ऊपर पहुंचा देगी और यादगार खिताब दिला देगी। हालांकि वेस्ली सो ने टाईब्रेक जीत लिया लेकिन उस जीत से उन्हें सिर्फ डेढ़ अंक मिला जिससे उनके कुल अंक 17 रहे जबकि प्रज्ञानानंदा ने 18 अंक के साथ खिताब जीता। खिताब जीतने की उम्मीद के साथ आखिरी दौर में उतरे अलीरेजा 15.5 अंक के साथ तीसरे स्थान पर रहे। मैच के बाद प्रज्ञानानंदा ने बताया कि चेन्नई में अपनी मां से हुई बातचीत ने उनका हौसला बढ़ाया था।