Sunday, 27 Sep 2026

पीड़ित महिला की बात बिना पूर्वाग्रह सुनें: महिला आयोग

भोपाल (11 सितंबर 26)। राष्ट्रीय महिला आयोग के तत्वावधान में मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग द्वारा महिलाओं को हिंसा एवं अन्य संकट की परिस्थितियों में प्रभावी, संवेदनशील एवं समन्वित सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वन स्टॉप सेंटर के काउंसलर्स एवं केस वर्कर्स के लिए एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव ने कहा कि जब कोई महिला अथवा बालिका अपनी समस्या लेकर वन स्टॉप सेंटर पहुंचती है, तो काउंसलर का पहला दायित्व उसकी बात को बिना किसी पूर्वाग्रह, निर्णय या निष्कर्ष के ध्यानपूर्वक सुनना है। महिला की परिस्थितियों को समझे बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उसके लिए और अधिक कठिनाई पैदा कर सकता है।

प्रशिक्षण के दौरान भारतीय न्याय संहिता, दंड संबंधी कानूनों, पॉक्सो अधिनियम, दहेज प्रतिषेध अधिनियम, बाल विवाह निषेध अधिनियम, घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, नागरिक सुरक्षा से संबंधित प्रावधानों सहित अन्य कानूनों की बारीकियों एवं उनके व्यावहारिक क्रियान्वयन की जानकारी दी गई। साथ ही महिलाओं के विरुद्ध हिंसा की रोकथाम के लिए बालकों एवं युवाओं में भी लैंगिक समानता, सम्मान और संवेदनशीलता की समझ विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। आयोग के सदस्य सुरेश तोमर ने सर्वाइवर केंद्रित रणनीति पर चर्चा करते हुए कहा कि प्रत्येक पीड़ित महिला की सुरक्षा, सम्मान, गोपनीयता, आवश्यकताओं और निर्णय लेने की क्षमता को केंद्र में रखकर सहायता एवं पुनर्वास की व्यवस्था की जानी चाहिए। प्रशिक्षण के दूसरे सत्र में प्राची चंदेल ने केस डॉक्यूमेंटेशन, रिकॉर्ड संधारण एवं डेटा के व्यवस्थित प्रबंधन के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। 

केस वर्कर्स एवं काउंसलर्स को भारत सरकार द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया के अनुरूप प्रकरणों पर कार्य करने की प्रक्रिया समझाई गई। महिला की व्यक्तिगत जानकारी एवं प्रकरण से संबंधित सूचनाओं को पूर्ण रूप से गोपनीय रखने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही आवश्यक सहमति प्रपत्रों को नियमानुसार भरवाने और महिला को उपलब्ध सभी आवश्यक सेवाएं एवं सहायता प्रदान करने की बात कही गई। विशेषज्ञों ने कहा कि वन स्टॉप सेंटर की जिम्मेदारी केवल महिला की प्रारंभिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रकरणों में नियमित फॉलोअप लेना भी आवश्यक है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि महिला को आवश्यक सहायता वास्तव में प्राप्त हो रही है और वह सुरक्षित स्थिति में है।

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