काठमांडू (03 सितंबर 26)। नेपाल में बुधवार को अचानक आई भयानक बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,127 हो गई और लगभग 4,900 लोग अब भी लापता हैं। बचावकर्मी बारिश और मलबे के बीच काम कर रहे हैं, जबकि प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने कहा कि इस आपदा का जलवायु परिवर्तन से संबंध अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने मजबूती से उठाया जाना चाहिए। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को बर्फ और चट्टानों के खिसकने से आई अचानक बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कस्बों और गांवों में भारी तबाही मचाई, जिससे हर तरफ बर्बादी फैल गई और हजारों लोग लापता हो गए।
नेपाल की संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा में प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने बुधवार को कहा कि भोटेकोशी नदी में भयावह बाढ़ आने से मची तबाही जलवायु परिवर्तन के कारण हुई और इसके प्रभावों को कम करने करने की जिम्मेदारी भी वैश्विक समुदाय पर है। उन्होंने कहा, 'जानकारों के मुताबिक, रसुवा जिले की भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ हिमालय में बर्फ और चट्टानों के खिसकने की वजह से हुई थी। यह घटना दिखाती है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों को बढ़ते खतरों का सामना करना पड़ रहा है।' शाह ने जोर देते हुए कहा, 'इसलिए, हमें अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने मजबूती से यह बात रखनी होगी कि यह आपदा जलवायु परिवर्तन से जुड़ी है।' प्रधानमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन में पूरी दुनिया की भूमिका है और इसके असर को संभालने और कम करने की जिम्मेदारी भी वैश्विक समुदाय की है। नेपाल पुलिस के अनुसार, चितवन से 348, नवलपरासी पूर्व से 217, नवलपरासी पश्चिम से 190 और नुवाकोट से 155 शव बरामद किए गए हैं। इसी तरह गोरखा से 66, धादिंग से 59, रसुवा से 45 और तनाहूं से 38 शव बरामद हुए हैं।
पुलिस ने बताया कि 1,113 शवों का पोस्टमार्टम और कानूनी पहचान की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है, जबकि 95 शव परिजनों को सौंपे जा चुके हैं। लापता परिजनों की पहचान में परिवारों की मदद के लिए 911 अज्ञात शवों का विवरण नेपाल पुलिस की वेबसाइट पर अपलोड किया गया है। पुलिस के मुताबिक,अब तक सुरक्षा बलों ने प्रभावित इलाकों से 6,541 लोगों को सुरक्षित निकाला है, जबकि 4,858 लापता लोगों की तलाश अभी जारी है। अधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में 7,912 पुलिसकर्मियों को तैनात किया है।