नईदिल्ली (01 जुलाई 24)। केन्द्रीय गृह एव सहकारिता मंत्री अमित शाह ने देशभर में आज से लागू हुए 3 नए आपराधिक कानूनों को दंड की जगह न्याय देने वाला और पीड़ित-केन्द्रित बताया। उन्होंने कहा कि नए कानूनों में दंड की जगह न्याय को प्राथमिकता मिलेगी, देरी की जगह स्पीडी ट्रायल और स्पीडी जस्टिस मिलेगा और पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित होगी। नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि नए आपराधिक कानूनों के बारे में कई प्रकार की भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं, जिनका उद्देश्य जनता के मन में इन कानूनों के बारे में भ्रम पैदा करना है। उन्होंने कहा कि नए कानूनों को हर पहलू पर 4 वर्षों तक विस्तार से अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स के साथ चर्चा करके लाया गया है और आजादी के बाद से अब तक किसी भी कानून पर इतनी लंबी चर्चा नहीं हुई है।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आजादी के 77 साल बाद भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली आज पूर्णतया स्वदेशी हो रही है और यह तीन नए कानून आज से देश के हर पुलिस थाने में लागू हो जाएंगे। शाह ने कहा कि इन कानूनों के आधार में दंड की जगह न्याय, देरी की जगह त्वरित ट्रायल और त्वरित न्याय को रखा गया है। इसके साथ ही पहले के कानूनों में सिर्फ पुलिस के अधिकारों की रक्षा की गई थी लेकिन इन नए कानूनों में अब पीड़ितों और शिकायतकर्ता के अधिकारों की भी रक्षा करने का प्रावधान है। अमित शाह ने कहा कि कल मध्यरात्रि से देशभर में प्रभाव में आए इन तीन नए कानूनों के लागू होने से हमारे देश की पूरी आपराधिक न्याय प्रणाली में भारतीय आत्मा दिखाई देगी। उन्होंने कहा कि इन कानूनों में कई ऐसे प्रावधान किए गए हैं जिनसे देश के नागरिकों को कई प्रकार के फायदे होंगे। उन्होंने कहा कि इन कानूनों में अंग्रेजों के समय विवाद में रहे कई प्रावधानों को हटाकर आज के समय के अनुकूल धाराएं जोड़ी गई हैं।