माले (24 सितंबर 26)। मालदीव इस समय गंभीर विदेशी मुद्रा संकट से जूझ रहा है। देश के पास उपलब्ध डॉलर भंडार पर दबाव इतना बढ़ गया है कि हालिया रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा भंडार करीब डेढ़ महीने के आयात के बराबर रह गया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF आम तौर पर करीब तीन महीने के आयात के बराबर सुरक्षित भंडार रखने की जरूरत बताता है। मालदीव की अर्थव्यवस्था आयात पर काफी निर्भर है। खाद्य पदार्थ, ईंधन, दवाइयां और निर्माण सामग्री जैसी जरूरी चीजों के लिए देश को बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा की जरूरत पड़ती है। ऐसे में डॉलर की कमी का सीधा असर आयात और घरेलू कारोबार पर पड़ सकता है।
द डिप्लोमैट की रिपोर्ट के मुताबिक मालदीव को 2026 में करीब 1.7 अरब डॉलर के विदेशी कर्ज की अदायगी का सामना करना पड़ रहा है। यह भुगतान देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर अतिरिक्त दबाव डाल रहा है। विश्व बैंक ने भी मालदीव की बाहरी वित्तीय स्थिति पर दबाव का उल्लेख किया है। उसके अनुसार 2026 में देश की बाहरी कर्ज अदायगी की जरूरत करीब एक अरब डॉलर और रह गई थी, जबकि अप्रैल में 500 मिलियन डॉलर के सुकुक और 400 मिलियन डॉलर के मुद्रा विनिमय समझौते के भुगतान के बाद विदेशी मुद्रा भंडार में तेज गिरावट आई थी। डॉलर संकट के बीच मालदीव ने भारत से जुड़े 150 मिलियन डॉलर के ट्रेजरी बिल की पूरी बकाया राशि चुका दी है। अंतिम 50 मिलियन डॉलर का भुगतान 17 सितंबर को किया गया। यह सुविधा 2019 में मालदीव की पिछली सरकार के दौरान भारतीय स्टेट बैंक द्वारा खरीदे गए ट्रेजरी बिलों के जरिए उपलब्ध कराई गई थी। भारत की ओर से इस सुविधा को कई बार आगे बढ़ाया गया था। लेकिन सितंबर में अंतिम 50 मिलियन डॉलर की अवधि बढ़ाने के अनुरोध को भारत ने स्वीकार नहीं किया। इसके बाद मालदीव ने 17 सितंबर को यह राशि चुका दी। भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक इस पूरी व्यवस्था के दौरान भारत ने करीब 45 मिलियन डॉलर के ब्याज का बोझ भी उठाया।
मालदीव के वित्त मंत्रालय के अनुसार अगस्त 2026 के अंत में आधिकारिक विदेशी मुद्रा भंडार करीब 644 मिलियन डॉलर था। हालांकि, वास्तविक रूप से तुरंत इस्तेमाल किए जा सकने वाले शुद्ध भंडार की स्थिति इससे काफी कम थी। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अगस्त के अंत में यह करीब 200.6 मिलियन डॉलर था। द डिप्लोमैट ने मौजूदा स्थिति को लगभग डेढ़ महीने के आयात के बराबर बताया है। इसका मतलब यह है कि विदेशी मुद्रा की उपलब्धता को लेकर सरकार के सामने लगातार दबाव बना हुआ है।