नईदिल्ली (24 अगस्त 26)। देश में एलपीजी की सप्लाई व्यवस्था में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) ने करीब 7,000 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश से लगभग 1,800 किलोमीटर लंबी नई एलपीजी पाइपलाइन परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इन नई पाइपलाइनों के जरिए देश के विभिन्न राज्यों तक एलपीजी पहुंचाने की व्यवस्था पहले के मुकाबले काफी मजबूत और सुरक्षित होगी।
पीएनजीआरबी द्वारा मंजूर की गई ये तीन खास एलपीजी पाइपलाइन परियोजनाएं देश के छह राज्यों-तेलंगाना, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, कर्नाटक और गोवा तक फैलेंगी। इन परियोजनाओं के तहत निम्नलिखित तीन रूट तैयार किए जाएंगे- चेरलापल्ली से नागपुर: तेलंगाना के चेरलापल्ली से महाराष्ट्र के नागपुर तक करीब 556 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जाएगी। झांसी से सितारगंज: उत्तर प्रदेश के झांसी से उत्तराखंड के सितारगंज तक लगभग 611 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन का निर्माण किया जाएगा। शिक्रापुर से गोवा और हुबली: महाराष्ट्र के शिक्रापुर से गोवा और कर्नाटक के हुबली तक करीब 633 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन विकसित की जाएगी। इन तीनों महत्वपूर्ण परियोजनाओं को सरकारी कंपनी गेल (GAIL - India Limited) द्वारा विकसित किया जाएगा। इन नई परियोजनाओं के पूरा होने के बाद देश का पीएनजीआरबी द्वारा अधिकृत कॉमन-कैरियर एलपीजी पाइपलाइन नेटवर्क करीब 7,700 किलोमीटर से बढ़कर लगभग 9,500 किलोमीटर तक पहुंच जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि देश के एलपीजी पाइपलाइन नेटवर्क में करीब 23.5% का भारी विस्तार होगा, जिससे देश के अलग-अलग हिस्सों तक ईंधन पहुंचाने में बड़ी मदद मिलेगी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना से न केवल एलपीजी की आपूर्ति सुदृढ़ होगी, बल्कि इसके कई अन्य फायदे भी होंगे। एलपीजी की सप्लाई पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और मजबूत होगी। सड़कों पर एलपीजी टैंकरों की आवाजाही में कमी आएगी। टैंकरों की कमी होने से लंबी दूरी तक ईंधन पहुंचाने के परिवहन और लॉजिस्टिक खर्च में कमी आएगी। सड़क पर एलपीजी टैंकरों से होने वाले हादसों का जोखिम काफी हद तक कम हो जाएगा। सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा और साथ ही कार्बन उत्सर्जन पर भी इसका अनुकूल असर पड़ सकता है।