ग्वालियर (23 सितंबर 26)। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा एक बार फिर चर्चा में हैं। हाल ही में दतिया से विधायक बने घनश्याम सिंह की सदस्यता को लेकर हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। भाजपा नेता ने याचिका में आरोप लगाए हैं कि घनश्याम सिंह ने चुनावी शपथ पत्र में 1991 के आपराधिक मामले की जानकारी छिपाई है। आरोप है कि उनके खिलाफ 1991 में एफआईआर हुई थी जिसका जिक्र शपथ पत्र में नहीं किया गया। भाजपा नेता की याचिका पर जल्द ही हाईकोर्ट में सुनवाई हो सकती है।
घनश्याम सिंह के खिलाफ याचिका बीजेपी नेता और एडवोकेट दीपक बेलपत्री ने लगाई है जो उपचुनाव के वक्त कांग्रेस छोड़ बीजेपी आ गये थे। दीपक बेलपत्री ने जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर घनश्याम सिंह के निर्वाचन को चुनौती दी है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद दतिया में हुए चक्का जाम के मामले में दर्ज एफआईआर की जानकारी घनश्याम सिंह ने हालिया विधानसभा उपचुनाव के दौरान दाखिल चुनावी एफिडेविट में नहीं दी। मामला 21 मई 1991 को राजीव गांधी की हत्या के बाद दतिया में हुए विरोध प्रदर्शन और चक्का जाम से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि झांसी चुंगी, किला चौक सहित अन्य स्थानों पर हुए चक्का जाम को लेकर 22 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। इसमें घनश्याम सिंह समेत अन्य लोगों के नाम होने का दावा किया गया है। इसी एफआईआर को चुनावी हलफनामे में बताए जाने की अनिवार्यता को लेकर अब हाईकोर्ट में सवाल उठाया गया है।
विधायक घनश्याम सिंह ने कहा कि 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद आंदोलन और प्रदर्शन हुए थे, लेकिन उनके संज्ञान में कोई केस दर्ज होने की जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि वे करीब 40-45 साल से सक्रिय राजनीति में हैं और इस दौरान कई आंदोलन किए हैं। यदि किसी मामले में पुलिस ने केस दर्ज किया हो और वह उनके संज्ञान में नहीं आया हो तो उन्हें इसकी जानकारी नहीं रही।