Saturday, 03 Oct 2026

ड्राइविंग लाइसेंस नियम होंगे और सख्त: गडकरी

नईदिल्ली (06 अगस्त 26)। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को कहा कि सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए चालकों को लेन अनुशासन और यातायात नियमों का वैज्ञानिक प्रशिक्षण देना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि देश में हर साल सड़क हादसों में करीब 1.8 लाख लोगों की मौत हो जाती है। राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूरक सवालों का जवाब देते हुए गडकरी ने कहा, 'यह बेहद दुखद है कि हर साल हमारे यहां 1,80,000 लोगों की मौत होती है।' उन्होंने कहा कि इन मौतों के पीछे कई कारण हैं, लेकिन 'सबसे महत्वपूर्ण कारण इंसान का व्यवहार है।'

गडकरी ने कहा, 'हमारे देश में चालकों को अच्छा प्रशिक्षण देने की जरूरत है।' सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री ने कहा कि चालकों को लेन अनुशासन और यातायात नियमों का वैज्ञानिक प्रशिक्षण दिया जाना बहुत महत्वपूर्ण है। वह मनोनीत सदस्य सुधा मूर्ति के पूरक प्रश्न का जवाब दे रहे थे। मूर्ति ने कहा था कि देश में अच्छी सड़कें हैं, लेकिन दुर्घटनाएं भी बहुत अधिक हो रही हैं। उन्होंने पूछा था कि क्या सरकार के पास चालकों को लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए कोई नयी व्यवस्था या योजना है ? बाद में मूर्ति ने मीडिया से बातचीत में कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग बहुत अच्छे हैं, लेकिन कई बार तेज और लापरवाही से वाहन चलाने वाले चालकों के कारण दुर्घटनाएं होती हैं।

उन्होंने कहा, 'अधिकतर मामलों में चालक अच्छी तरह प्रशिक्षित नहीं होते और संभव है कि उन्होंने गलत तरीकों से लाइसेंस हासिल किए हों। यह साबित करने के लिए कोई रिकॉर्ड या वीडियो नहीं होता कि उन्होंने ड्राइविंग टेस्ट कैसे पास किया। कई मामलों में नाबालिग चालक भी बिना परिणाम समझे वाहन चलाते हैं।' मूर्ति ने सरकार से ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को और सख्त तथा पारदर्शी बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि ड्राइविंग टेस्ट के दौरान वीडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि केवल योग्य लोगों को ही वाहन चलाने की अनुमति मिले और सड़क दुर्घटनाएं कम हों। भाजपा सदस्य रेखा शर्मा ने राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के समय से कार्यान्वयन में देरी को कम करने के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में सवाल किया। इस पर गडकरी ने कहा कि जमीन अधिग्रहण राज्य का विषय है और परियोजनाओं के लिए जमीन के साथ-साथ पर्यावरण और वन मंजूरी भी लेनी होती है।

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