नईदिल्ली (06 अक्टूबर 26)। कांग्रेस ने सोमवार को आरोप लगाया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर संविधान के साथ विश्वासघात किया और मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में 'अवैध और एकतरफा' बदलाव भी किया। मुख्य विपक्षी दल ने यह भी कहा कि निर्वाचन आयोग के प्रति जनता का विश्वास बहाल करने का उच्चतम न्यायालय के पास यह महत्वपूर्ण अवसर है।
उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को उन याचिकाओं पर निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया, जिनमें आरोप लगाया गया है कि आयोग ने दोनों निर्वाचन आयुक्तों की मंजूरी के बिना कई फैसले लिए। शीर्ष अदालत ने कहा कि जो भी फैसला कानून के अनुरूप नहीं पाया जाएगा, उसे रद्द कर दिया जाएगा। हालांकि, अदालत ने अंतिम फैसला आने तक सीईसी ज्ञानेश कुमार को कोई भी फैसला लेने से रोकने के लिए अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म-6 में 'अवैध और एकतरफा' तरीके से बदलाव किए और यह भाजपा को मदद पहुंचाने के लिए अपने पद के दुरुपयोग का 'एक और सबूत' है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को रद्द करना तथा मतपत्र के जरिए चुनाव कराना, ये तीन ऐसी प्रमुख मांगें हैं जिनसे उनकी पार्टी समझौता नहीं करेगी। खरगे ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि देशभर में कांग्रेस कार्यकर्ता और 'इंडिया' गठबंधन के सहयोगी दल इन तीन मुद्दों को लेकर सड़कों पर हैं। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सीईसी ने न केवल 'झूठ बोला' बल्कि कानून का उल्लंघन किया और प्रधानमंत्री तथा गृह मंत्री के इशारे पर 'संविधान के साथ विश्वासघात' किया। उन्होंने फॉर्म-6 में कथित बदलाव को पूरी तरह बचाव योग्य न होने वाला आचरण करार दिया।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने सोमवार को स्पष्ट किया कि उच्चतम न्यायालय ने एसआईआर के दौरान मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 के किसी संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी है। जबकि निर्वाचन आयोग ने 26 सितंबर के अपने प्रेस नोट में कहा था कि फॉर्म-6 के साथ संलग्न घोषणा-पत्र को उच्चतम न्यायालय ने सही ठहराया है।