लखनऊ (12 अक्टूबर 24)। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर के विपिन खंड में जय प्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन केंद्र (JPNIC) में शुक्रवार को समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव को जाने से रोकने पर सपा समेत विपक्षी दलों और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) में जुबानी जंग तेज हो गई है। भाजपा ने JPNIC को 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की समाजवादी सरकार के कार्यकाल में व्याप्त भ्रष्टाचार का नमूना करार दिया है। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता आलोक अवस्थी ने कहा कि 2012 से 2017 के बीच सत्ता में रही अखिलेश यादव सरकार का कार्यकाल काम नहीं बल्कि कारनामों के लिए जाना जाता है और जेपीएनआईसी इन्हीं काले कारनामों में से एक है। वास्तव में जेपीएनआईसी परियोजना भ्रष्टाचार का जीता जागता उदाहरण है, जहां तीन बार बजट रिवाइज कर घोटाले को अंजाम दिया गया, लेकिन फिर भी निर्माण कार्य पूरा नहीं किया जा सका। वहीं, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि पिछले साल भी भाजपा सरकार ने इस तरह की तानाशाही की थी और यह लगता है कि किसी न किसी व्यापारी को बेचने की तैयारी हो रही है तभी इस तरह की हरकत की जा रही है। उन्होंने भाजपा सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए आलोचना की। इस मामले पर केशवप्रसाद मौर्य ने कहा कि सपा मुखिया अखिलेश यादव का यह घोर दोहरा चरित्र है। मौर्य ने कहा, 'एक तरफ़ वह राहुल गांधी की खुल्लम-खुल्ला दरबारी करते हैं, दूसरी तरफ़ उन लोकनायक जयप्रकाश नारायण को भी पूजना चाहते हैं जिन्होंने देश को कांग्रेस की काली तानाशाही से मुक्त कराया था।'