बर्लिन (25 सितंबर 26)। ग्रीन हाइड्रोजन की वैश्विक दौड़ में भारत की भूमिका लगातार बड़ी होती जा रही है। जर्मनी के पूर्व सांसद और ग्रीन हाइड्रोजन आयुक्त डॉ. स्टीफन कॉफमैन ने कहा है कि यूरोप को हरित हाइड्रोजन की लागत घटाने और इसे जीवाश्म ईंधन के मुकाबले प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए भारत की विनिर्माण क्षमता और विशाल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता की जरूरत है। कॉफमैन ने भारत और जर्मनी के बीच हरित ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जर्मनी के पास इलेक्ट्रोलाइजर जैसी अत्याधुनिक तकनीक है, लेकिन इसकी लागत फिलहाल काफी अधिक है। उनके अनुसार भारत की औद्योगिक क्षमता और बड़े पैमाने पर उत्पादन इस तकनीक की लागत कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इससे ग्रीन हाइड्रोजन को पारंपरिक यानी ग्रे हाइड्रोजन के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकेगा।
कॉफमैन ने कहा कि जर्मनी में इलेक्ट्रोलाइजर तकनीक मजबूत है, लेकिन लागत बहुत ज्यादा है। ऐसे में जर्मन और भारतीय कंपनियों के बीच सहयोग से इलेक्ट्रोलाइजर उद्योग को बड़े स्तर पर विकसित करने के अवसर मौजूद हैं। ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन में इलेक्ट्रोलाइजर महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह नवीकरणीय बिजली का इस्तेमाल करके पानी से हाइड्रोजन अलग करने में मदद करता है। कॉफमैन के मुताबिक चीन के अलावा भारत में अभी बड़े पैमाने का इलेक्ट्रोलाइजर उद्योग विकसित होना बाकी है। ऐसे में जर्मन तकनीक और भारतीय विनिर्माण क्षमता का मेल इस क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा कर सकता है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग के साथ-साथ भारत में उत्पादित ग्रीन हाइड्रोजन को यूरोप और जर्मनी तक पहुंचाने के लिए व्यापार और निर्यात गलियारे भी विकसित किए जा सकते हैं। कॉफमैन ने कहा कि भारत के पास ग्रीन हाइड्रोजन और उससे जुड़े उत्पादों के बड़े पैमाने पर उत्पादन की क्षमता है।
यूरोप के लिए भारत से ग्रीन हाइड्रोजन खरीदना और उसे जर्मनी समेत यूरोपीय बाजारों तक पहुंचाना सहयोग का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बन सकता है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में भारत इस क्षेत्र में तेजी से सामने आया है और कई बड़ी भारतीय कंपनियां यूरोपीय कंपनियों के साथ व्यावसायिक समझौते तथा भविष्य की खरीद के करार कर रही हैं। कॉफमैन ने भारत के कई बड़े उद्योग समूहों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एएम ग्रीन, एसीएमई, रिलायंस और अडानी जैसी कंपनियां ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में सक्रिय रूप से आगे आ रही हैं।