इंदौर (14 सितंबर 26)। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के कार्यक्रम के लिए स्थल के किराए के रूप में इंदौर विकास प्राधिकरण द्वारा 10 लाख रुपए का शुल्क लेने पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा है कि कांग्रेस के लिए राशि महत्वपूर्ण नहीं थी। 10 लाख की जगह 10 करोड़ रुपए भी मांगते तो देने को तैयार थे। हमारे कार्यकता इतनी रकम एकत्रित कर लेते। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों की आवाज को मंच देना है। खर्च को लेकर विवाद खड़ा करने के बजाय चर्चा इस बात पर होनी चाहिए कि छात्रों के सामने कौन-कौन से सवाल हैं।
रविवार को इंदौर प्रेस क्लब में राहुल गांधी के छात्रों की गूंज कार्यक्रम के संदर्भ में आयोजित प्रेस कांफ्रेस में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि देश में शिक्षा व्यवस्था को लेकर ऐसी खुली चर्चा होनी चाहिए, जिसमें सरकार के साथ निजी शिक्षण संस्थान, विद्यार्थी, अभिभावक और विशेषज्ञ भी अपनी बात रखें। शिक्षा व्यवस्था से रोजगार की कड़ी कमजोर हो रही है, ऐसे में इस मुद्दे पर देश में व्यापक चर्चा जरूरी है। छात्रों से जुड़े सवालों पर जितनी व्यापक चर्चा होगी, उतना ही सरकार पर व्यवस्था में सुधार के लिए दबाव बनेगा। पटवारी ने कहा कि आज शिक्षा का सवाल सिर्फ स्कूल-कॉलेज तक सीमित नहीं है। इसका सीधा संबंध युवाओं के भविष्य और रोजगार से है। उन्होंने सवाल उठाया कि बड़ी संख्या में युवा वर्षों तक पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन अंत में उनके सामने रोजगार चुनौती बनी रहती है। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था की दिशा और उसके परिणामों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। पटवारी ने निजी स्कूलों और कॉलेजों को लेकर कहा कि वे भी मौजूदा शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा हैं। शिक्षा को अफोर्डेबल बनाने, फीस, गुणवत्ता और नई शिक्षा नीति जैसे विषयों पर व्यापक संवाद जरूरी है। किसी एक पक्ष के नजरिए से शिक्षा व्यवस्था की समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता।
नीट सहित प्रतियोगी परीक्षाओं में सामने आए पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों का जिक्र करते हुए पटवारी ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था पर छात्रों का भरोसा सबसे अहम है। यदि मेहनत के बाद भी विद्यार्थी यह मानने लगे कि व्यवस्था निष्पक्ष नहीं है तो इसका सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ता है। पटवारी ने शिक्षा से जुड़े आंदोलनों और घटनाओं में आरएसएस से जुड़े लोगों की कथित भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जहां किसी संगठन की मौजूदगी या भूमिका को लेकर सवाल सामने आते हैं, वहां इस पर सार्वजनिक चर्चा होनी चाहिए। उनका कहना था कि व्यवस्था को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखना जरूरी है। पटवारी ने कहा कि देश की राजनीति का केंद्र जाति और धर्म के बजाय शिक्षा, रोजगार और युवाओं के भविष्य जैसे मुद्दे होने चाहिए।