Saturday, 03 Oct 2026

चीन में क्लासेज़ के नाम पर तिब्बती बच्चों की ब्रेनवॉशिंग

बीजिंग (25 जनवरी 26)। चीन में चल रहे ‘तिब्बत क्लासेज़’ कार्यक्रम को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। साल 2025 में 10,500 तिब्बती बच्चों को चीन के अलग-अलग शहरों में स्थित इन स्कूलों में दाखिला दिया गया। यह इस कार्यक्रम की शुरुआत के बाद अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। यह जानकारी तिब्बत ऑटोनॉमस रीजन के शिक्षा विभाग की रिपोर्ट में सामने आई है, जिसे तिब्बती वेबसाइट Phayul ने प्रकाशित किया। रिपोर्ट के अनुसार 2025 में 5 नए स्कूल सिर्फ तिब्बती बच्चों के लिए खोले गए।150 जूनियर स्कूल क्लासेज़ में 2,000 बच्चे, 205 सीनियर स्कूल क्लासेज़ में 4,500 बच्चे, 223 वोकेशनल (तकनीकी) क्लासेज़ में 4,000 बच्चे दाखिल किए गए। इनमें से 3,215 बच्चे तिब्बत क्षेत्र से हैं, जबकि 785 बच्चे छिंगहाई प्रांत से हैं, जो पारंपरिक तिब्बती इलाका माना जाता है।

चीनी सरकार का कहना है कि करीब 70 प्रतिशत बच्चे गरीब, ग्रामीण, घुमंतू और सीमावर्ती इलाकों से आते हैं। आलोचकों का कहना है कि ऐसे बच्चे जल्दी प्रभावित होते हैं और उन्हें अपनी भाषा-संस्कृति से दूर किया जा रहा है। रिपोर्ट बताती है कि 2023 के बाद से हर साल लगभग 10 प्रतिशत की दर से दाखिले बढ़े हैं। चीन इस योजना को 'तीन बढ़ोतरी और तीन कवरेज' नीति के तहत चला रहा है। इसका मतलब है ज्यादा बोर्डिंग स्कूल, ज्यादा बच्चे और ज्यादा स्कूलऔर सभी दूर-दराज़ व सीमावर्ती इलाकों को शामिल करना। तिब्बती संगठन और मानवाधिकार समूहों का कहना है कि यह शिक्षा से ज्यादा राजनीतिक दिमागी प्रशिक्षण है। बच्चों को उनकी भाषा, धर्म और परंपरा से दूर किया जा रहा है।  उन्हें कम उम्र में घर से निकालकर चीनी विचारधारा सिखाई जा रही है। उनका आरोप है कि यह तिब्बती पहचान को धीरे-धीरे खत्म करने की नीति है। ‘तिब्बत क्लासेज़’ की शुरुआत 1984 में हुई थी। 1996 में चीन सरकार ने इसे सिर्फ शिक्षा नहीं, बल्कि राजनीतिक जिम्मेदारी बताया था। आज 23 प्रांतों 60 बड़े शहरों और 129 स्कूलों में यह कार्यक्रम चल रहा है। चीन का दावा है कि अब तक 1.8 लाख तिब्बती छात्र इन स्कूलों से पढ़ चुके हैं और अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहे हैं।

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