Tuesday, 29 Sep 2026

ग्लोबल स्किल्स पार्क के प्लेसमेंट 98.9 प्रतिशत: सीएम

भोपाल (21 अगस्त 26)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उद्योग क्षेत्र की आवश्यकताओं के दृष्टिगत संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल पार्क भोपाल आने वाले समय में प्रतिवर्ष 10 हजार युवाओं को प्रशिक्षित करने का कार्य करेगा। वर्तमान में यह संस्थान प्रतिवर्ष 2 हजार युवाओं को विभिन्न तरह के कौशल पाठ्यक्रमों द्वारा प्रमाण-पत्र प्रदान कर रहा है। वर्ष 2026 में 3 हजार युवा प्रशिक्षित होंगे। यह संख्या निरंतर बढ़ेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव, शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क में अभिमुखीकरण समारोह को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत में युवाओं के लिए अवसरों की कोई कमी नहीं है। वे युवाओं के लिए निरंतर अवसर बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने सदैव हर क्षेत्र में कौशल विकास को प्राथमिकता दी है। मध्यप्रदेश कृषि प्रधान राज्य है। अब हमें इसके साथ ही अपनी क्षमता और बुद्धि के बल पर कौशल भी प्राप्त करना होगा। वर्तमान दौर में कौशल की आवश्यकता की पूर्ति करते हुए भारत दुनिया के साथ कदम से कदम मिलते हुए आगे बढ़ रहा है। दुनिया के कई देशों ने प्रगति की है, लेकिन इसमें भी कहीं ना कहीं भारतीयों का हाथ जरूर रहता है। देश और प्रदेश की विकास यात्रा में संत शिरोमणि ग्लोबल स्किल पार्क की महत्वपूर्ण भूमिका है। आज से करीब सौ- डेढ़ सौ साल पहले किसी कार्य करने के लिए डिग्री की आवश्यकता नहीं होती थी। हम अपने कौशल और दक्षता के बल पर स्वावलंबन का रास्ता अपनाकर आगे बढ़ रहे थे। तत्कालीन समय में धीरे-धीरे सर्विस सेक्टर बढ़ता गया और भारतीय प्रतिभाओं का पर्याप्त इस्तेमाल नहीं हो सका। हमारे युवा अपने कौशल से बेहतर जीवन जी सकते हैं। इस संस्थान में उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान सहित अनेक राज्यों के विद्यार्थी कौशल प्रशिक्षण प्राप्त करने आए हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संत रविदास जी महाराज का 650 वीं जयंती वर्ष चल रहा है। अपने कर्म के प्रति निष्ठा, समाज सुधार और निष्काम जीवन जीने सहित कई कारणों से हम उन्हें स्मरण करते हैं। संत रविदास जी ने अनेक भजन तैयार किए, जो कालजयी बने। संत रविदास जी से प्रेरणा मिलती है कि हमें अपने कौशल पर पूरा भरोसा होना चाहिए। कौशल के प्रकटीकरण में कोई समझौता नहीं होना चाहिए। कौशल के माध्यम से अपना जीवन बेहतर बनाने और सामाजिक उत्तरदायित्व पूरा करने में संत रविदास जी की अहम भूमिका थी। उन्होंने तत्कालीन समय में अस्पृश्यता जैसी अनेक चुनौतियां का सामना किया। उन्होंने राणा सांगा जैसे शासकों को अपना शिष्य बनने का अवसर दिया। वे अपने जीवन के मूल भाव को कभी नहीं भूले।


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