बड़वानी (15 अगस्त 26)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों की समृद्धि और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। बड़वानी में एचडी पद्धति से कपास उत्पादन के माध्यम से किसानों की आय में हुई वृद्धि इसका सकारात्मक उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों के सुझावों और समस्याओं को सरकार पूरी संवेदनशीलता से सुनेगी और उनके निराकरण के लिए प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने शुक्रवार को बड़वानी जिले के प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत जिले के किसानों से सीधा संवाद किया। इस दौरान उन्होंने किसानों से खेती-किसानी से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा करते हुए उनकी समस्याओं, आवश्यकताओं, अनुभवों और सुझावों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने किसानों से फसल उत्पादन, सिंचाई सुविधाओं, कृषि आदानों की उपलब्धता तथा शासन की विभिन्न योजनाओं से मिल रहे लाभ के संबंध में भी जानकारी प्राप्त की।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हित और कल्याण के लिए लगातार कार्य कर रही है। प्रदेश में इस वर्ष किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है और किसानों की समृद्धि के लिए योजनाबद्ध प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार का उद्देश्य किसानों को शासकीय योजनाओं का लाभ समय पर उपलब्ध कराने के साथ ही उनकी आय बढ़ाना और कृषि को अधिक लाभकारी बनाना है। किसानों ने मुख्यमंत्री डॉ यादव को बताया कि जिले में एचडी पद्धति से कपास उत्पादन की शुरुआत की गई है। इस पद्धति में खाद की आवश्यकता अपेक्षाकृत कम होती है और उत्पादन में भी वृद्धि देखने को मिल रही है। इससे किसानों को अधिक लाभ प्राप्त हो रहा है। किसानों ने बताया कि प्रारंभिक चरण में जिले में लगभग 5 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में एचडी पद्धति से कपास की खेती शुरू की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों से कृषि में अपनायी जा रही नई तकनीकों और नवाचारों के संबंध में जानकारी ली तथा ऐसी तकनीकों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया, जिनसे उत्पादन लागत कम हो और किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के किसान संवाद के दौरान किसानों ने खुलकर अपनी बात रखी और खेती-किसानी से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा सीधे किसानों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं और सुझाव सुनने की पहल का किसानों ने स्वागत किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में किसान, जनप्रतिनिधि और कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद थे।