Wednesday, 30 Sep 2026

किरण चौधरी ने 4 दशक बाद कांग्रेस को कहा अलविदा

नईदिल्ली (19 जून 24)। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल की पुत्रवधू किरण चौधरी ने बेटी श्रुति के साथ कांग्रेस का हाथ छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया। दिल्ली भाजपा मुख्यालय में किरण व श्रुति ने मुख्यमंत्री नायब सैनी और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल की मौजूदगी में भाजपा की सदस्यता ली। इसी के साथ कांग्रेस में किरण चौधरी के 40 वर्षीय लंबे राजनीतिक कैरियर का अंत हो गया। 

किरण चौधरी और श्रुति चौधरी ने बीते दिन अपना इस्तीफा मल्लिकार्जुन खरगे को भेजा था। इस्तीफे में उन्होंने लिखा कि हरियाणा में कांग्रेस व्यक्ति सेंट्रिक पार्टी हो गई है। उन्होंने बिना नाम लिए हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा की ओर इशारा किया। इसके साथ ही लिखा कि पार्टी व्यक्तिगत जागीर की तरह चलाई जा रही है। मेरे जैसे ईमानदार लोगों की पार्टी में कोई जगह नहीं है। मेरी आवाज दबाकर मुझे अपमानित किया गया। मेरे खिलाफ साजिशें रची गईं, हालांकि मेरा उद्देश्य हमेशा राज्य और देश के लोगों की सेवा करना रहा है।

किरण चौधरी के इस्तीफे में लिखे शब्दों से स्पष्ट है कि नाराजगी उनकी हुड्डा से थी। चौधरी और उनके कार्यकर्ताओं को वो राजनीतिक स्पेश नहीं मिल पा रहा था। जिसकी उम्मीद उन्हें थी। सर्वविदित है कि हरियाणा कांग्रेस 2 गुटों में बंटी हुई थी। एक गुट में कुमारी शैलजा, रणदीप सुरजेवाला और किरण चौधरी थीं, जिसको एसआरके गुट कहा जाता था। वहीं इसके समानांतर हुड्डा गुट में भूपेंद्र हुड्डा, दीपेंद्र हुड्डा व उदयभान हैं।

गौरतलब है कि कांग्रेस छोड़ने से पहले किरण चौधरी अपनी ही पार्टी और हुड्डा की मुखर आलोचना कर रहीं थी। उन्होंने यहां तक कह दिया था कि हरियाणा में कांग्रेस का कोई भविष्य नहीं है। इसके बाद से उनके कांग्रेस छोड़ने के कयास लगाए जा रहे थे। हालांकि इस बीच उन्होंने अगामी विधानसभा चुनाव के बाद कुमारी शैलजा को सीएम बनाने की पैरवी भी की थी। कुमारी शैलजा और किरण चौधरी में काफी अच्छे संबंध हैं, इसलिए लग रहा था, वह कांग्रेस में रह सकती हैं। 

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