Saturday, 03 Oct 2026

एमएसएमई, स्टार्टअप अर्थव्यवस्था की धड़कन: शेखावत

नईदिल्ली (29 अगस्त 25)। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) और स्टार्टअप भारत की अर्थव्यवस्था की धड़कन हैं। ये नवाचार को बढ़ावा देते हैं, रोजगार के अवसर पैदा करते हैं और विश्व मंच पर भारत की उद्यमशीलता की भावना को प्रदर्शित करते हैं। इसी ताकत से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का विकसित भारत का सपना पूरा होगा।

गुरुवार को भारत मंडपम् में 11वें इंडिया इंटरनेशनल एमएसएमई ट्रेड फेयर एंड एक्सपो- 2025 में 'विकसित भारत- द गोल्डन स्पैरो@2047' विषय पर अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि यह अत्यंत प्रेरणादायक और दूरदर्शी विषय है, जो वर्ष 2047 तक भारत को एक समावेशी, आत्मनिर्भर और पूर्णतः विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। 6 करोड़ से अधिक उद्यमों के साथ एमएसएमई न केवल करोड़ों लोगों को रोज़गार देता है, बल्कि औद्योगिक क्लस्टरों को मजबूती देता है। पारंपरिक हस्तशिल्प को संजोता है। हमारे निर्यात को शक्ति प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि एमएसएमई भारत की जीडीपी का लगभग 30 प्रतिशत योगदान करते हैं। 11 करोड़ से अधिक लोगों को रोज़गार प्रदान करते हैं। ये आंकड़े केवल नीतियों की नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आशाओं और गरिमा से जुड़ी कहानियों का प्रतीक हैं। 

शेखावत ने कहा कि एमएसएमई ‘विकसित भारत’ की कल्पना को इसलिए महत्वपूर्ण बनाते हैं, क्योंकि सच्चा विकास वही होता है, जो समृद्धि को समाज के हर कोने तक पहुंचाए। जब कच्छ की एक कुम्हारिन अपने मिट्टी के बर्तन विदेशों में बेच पाती है, जब हिमाचल के पहाड़ों में एक होम स्टे में ठहरने वाले सैलानी स्थानीय अनुभवों को अपनाते हैं या जब एक टियर-2 शहर की युवा उद्यमी अपने हस्तशिल्प कारोबार को डिजिटल माध्यम से आगे बढ़ाती है तो यह केवल आय अर्जित करने का जरिया नहीं होता, बल्कि पूरे समुदाय के बदलाव का माध्‍यम भी होता है। 

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