नईदिल्ली (26 मई 26)। एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान पश्चिम एशिया संकट में खुद को बड़ी कूटनीतिक ताकत के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है। लेकिन रिपोर्ट का कहना है कि पाकिस्तान असल में 'मध्यस्थ' नहीं बल्कि सिर्फ 'संदेश पहुंचाने वाले' की भूमिका निभा रहा है। यह रिपोर्ट 'द सेक्रेटेरिएट' नाम के एक थिंक टैंक की ओर से जारी की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान अपनी इस सक्रियता के बदले आर्थिक फायदे और अंतरराष्ट्रीय मदद हासिल करना चाहता है।रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था इस समय काफी कमजोर स्थिति में है। देश लगातार आर्थिक संकट, कर्ज और विदेशी मुद्रा की कमी से जूझ रहा है। ऐसे में इस्लामाबाद अपनी कूटनीतिक भूमिका का इस्तेमाल आर्थिक राहत पाने के लिए कर सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ वित्तीय समझौता किया है। साथ ही वह अमेरिका से आर्थिक पैकेज और China से अतिरिक्त कर्ज और अनुदान हासिल करने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अगर ईरान और अमेरिका के बीच कोई शांति समझौता होता है, तो पाकिस्तान उसका श्रेय लेने की कोशिश कर सकता है। हालांकि रिपोर्ट में साफ कहा गया कि इस प्रक्रिया में कई अन्य देशों की भी अहम भूमिका है। इन देशों में सऊदी अरब, कतर, तुर्की, ओमान और मिस्र जैसे देश शामिल बताए गए हैं। रिपोर्ट में पाकिस्तान पर यह आरोप भी लगाया गया कि वह खुद को 'वैश्विक शांति दूत' के रूप में पेश कर अपनी छवि सुधारने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान पर लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद और चरमपंथ को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे हैं। रिपोर्ट में चीन और पाकिस्तान की करीबी साझेदारी का भी जिक्र किया गया। इसमें कहा गया कि चीन पाकिस्तान को सैन्य उपकरण और रणनीतिक समर्थन देता है।
साथ ही चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा परियोजना के जरिए चीन को हिंद महासागर तक सीधी पहुंच मिलती है, जिससे उसकी क्षेत्रीय ताकत बढ़ती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि चीन कई बार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान का समर्थन करता रहा है और संयुक्त राष्ट्र में भी उसका बचाव करता है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को लेकर रिपोर्ट में कहा गया कि देश का टैक्स सिस्टम कमजोर है और आयात पर निर्भरता बहुत ज्यादा है। इसी वजह से पाकिस्तान को बार-बार आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है और उसे International Monetary Fund (IMF) से बेलआउट पैकेज लेने पड़ते हैं। यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है और ईरान तथा अमेरिक के बीच बातचीत जारी है। ऐसे में पाकिस्तान की भूमिका और उसकी मंशा को लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।