लेइडा (27 सितंबर 26)। इटली में स्कूलों में बुर्का और नकाब पर पाबंदी के फैसले को लेकर यूरोप में बहस जारी है, इसी बीच स्पेन से भी बड़ा फैसला सामने आया है। स्पेन के लेइडा शहर में नगर परिषद ने सार्वजनिक जगहों पर चेहरा पूरी तरह ढकने वाली चीजों या कपड़ों के इस्तेमाल पर रोक लगाने वाले स्थानीय कानून में बदलाव को मंजूरी दे दी है। खास बात यह है कि करीब 13 साल पहले इसी शहर का ऐसा ही फैसला अदालत में चुनौती के बाद रद्द हो चुका है। स्पेन के कैटेलोनिया क्षेत्र में स्थित लेइडा शहर ने ज्यादातर सार्वजनिक जगहों पर चेहरा पूरी तरह ढकने वाली चीजों या कपड़ों के इस्तेमाल पर रोक लगाने को मंजूरी दी है। नगर परिषद में शुक्रवार को हुए मतदान में प्रस्ताव के पक्ष में 16 और विरोध में 11 मत पड़े। नए नियम में बुर्का या नकाब का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया गया है।
इसके बजाय सार्वजनिक स्थानों पर चेहरे को पूरी तरह ढकने वाली चीजों या कपड़ों के साथ रहने या घूमने पर रोक का प्रावधान किया गया है। लेइडा में करीब डेढ़ लाख लोग रहते हैं और यह शहर बार्सिलोना से लगभग 150 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि शहर में इससे पहले भी सार्वजनिक स्थानों पर चेहरा पूरी तरह ढकने वाले नकाब पर प्रतिबंध लगाया गया था। लेइडा नगर परिषद ने वर्ष 2010 में कुछ सार्वजनिक स्थानों पर पूरा चेहरा ढकने वाले नकाब पर रोक लगाई थी। उस समय इसे स्पेन में इस तरह का पहला स्थानीय प्रतिबंध माना गया था। लेकिन इस फैसले को एक मुस्लिम संगठन ने अदालत में चुनौती दी। मामला स्पेन के सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और वर्ष 2013 में अदालत ने स्थानीय प्रतिबंध को रद्द कर दिया।
अदालत ने उस समय माना था कि इस तरह की रोक धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार से जुड़ा सवाल उठाती है और स्थानीय प्रशासन के अधिकार क्षेत्र से बाहर थी। इसके साथ ही दूसरे नगर निकायों में लागू किए गए इसी तरह के प्रतिबंधों को भी अदालत ने रद्द कर दिया था। इस बार लेइडा नगर परिषद ने ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया है जिनमें किसी खास धार्मिक परिधान का नाम नहीं लिया गया है। नए नियम में सार्वजनिक जगहों पर चेहरा पूरी तरह ढकने वाली वस्तुओं या कपड़ों के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है। हालांकि, नियम में कुछ अपवाद भी रखे गए हैं। बुनियादी अधिकारों के इस्तेमाल, पूजा स्थलों और उन स्थानों या परिस्थितियों से जुड़े मामलों में छूट का प्रावधान किया गया है जहां इस तरह की प्रथा सामाजिक रूप से स्वीकार्य मानी जाती है। नियम का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान है।