Monday, 28 Sep 2026

इंदौर के पहले एक्स्ट्रा हाई टेंशन सबस्टेशन के 60 वर्ष

इंदौर (30 अगस्त 26)। जब इंदौर में औद्योगिक विकास की नई संभावनाएं आकार ले रही थीं, तब 30 अगस्त 1966 को ऊर्जीकृत हुआ 132 केवी पोलोग्राउंड (चंबल) एक्स्ट्रा हाई टेंशन सबस्टेशन शहर की ऊर्जा व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बना। छह दशक बाद भी यह सबस्टेशन इंदौर महानगर को विश्वसनीय विद्युत पारेषण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अपने 60 वर्ष पूरे करने जा रहा यह सबस्टेशन मालवा क्षेत्र के औद्योगिक और शहरी विकास का एक महत्वपूर्ण साक्षी रहा है। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि 132 केवी पोलोग्राउंड (चंबल) सबस्टेशन इंदौर की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। इसने औद्योगिक विस्तार, आर्थिक गतिविधियों और शहरी विकास को आवश्यक ऊर्जा आधार उपलब्ध कराया है। अनेक पीढ़ियों के अभियंताओं और कर्मचारियों के योगदान से यह सबस्टेशन छह दशकों से प्रदेश की पारेषण व्यवस्था को सुदृढ़ बना रहा है।

मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) का यह सबस्टेशन प्रदेश के सबसे पुराने एक्स्ट्रा हाई टेंशन सबस्टेशनों में शामिल है। मालवा क्षेत्र में यह दूसरा तथा मध्यप्रदेश का पांचवां सबसे पुराना एक्स्ट्रा हाई टेंशन सबस्टेशन माना जाता है। वर्ष 1966 में स्थापित इस केंद्र ने इंदौर में उच्च गुणवत्ता वाली पारेषण व्यवस्था उपलब्ध कराकर औद्योगिक विस्तार और आर्थिक गतिविधियों को गति प्रदान की। उस समय इंदौर सूती वस्त्रो के निर्माता के रूप में जाना जाता था। भारत का मैनचेस्टर कहे जाने वाले इस शहर में चंबल सब स्टेशन से ही विभिन्न काटन मिलों के लिए बिजली जाती थी। पिछले छह दशकों में इंदौर ने एक प्रमुख व्यापारिक नगर से आधुनिक महानगर तक का सफर तय किया है। औद्योगिक क्षेत्रों, शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और आवासीय क्षेत्रों के विस्तार के साथ विद्युत मांग में लगातार वृद्धि हुई। इस अवधि में पोलोग्राउंड (चंबल) सबस्टेशन शहर की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने वाले प्रमुख पारेषण केंद्रों में शामिल रहा है।

समय के साथ यहां स्थापित उपकरणों, नियंत्रण एवं सुरक्षा प्रणालियों तथा पारेषण व्यवस्थाओं का निरंतर उन्नयन किया गया। आधुनिक मॉनिटरिंग और संरक्षण प्रणालियों को अपनाते हुए इस ऐतिहासिक सबस्टेशन को वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित किया जाता रहा है। हाल के वर्षों में परिसर में 33 केवी फीडरों के क्रॉसिंग नेटवर्क को भूमिगत केबल प्रणाली में परिवर्तित करने जैसे कार्य भी किए गए हैं, जिससे प्रणाली की विश्वसनीयता और सुरक्षा में वृद्धि हुई है। 10 एमवीए क्षमता के साथ शुरू हुए इस सब स्टेशन में वर्तमान में तीन पावर ट्रांसफार्मर है और इसकी क्षमता 176 एमवीए की है।1966 में एक औद्योगिक और एक घरेलू क्षेत्र को दो 33 केवी फीडरों के साथ विद्युत आपूर्ति शुरू करने वाले इस ऐतिहासिक सबस्टेशन मे अब 33 केवी के 16 फीडर हो गए हैं। पूर्व के विद्युत मंडल और वर्तमान में एमपी ट्रांसको के अभियंताओं और तकनीकी कर्मचारियों द्वारा नियमित परीक्षण, प्रिवेंटिव मेंटेनेंस तथा सुरक्षा मानकों के पालन के कारण यह सबस्टेशन छह दशक बाद भी प्रभावी ढंग से कार्य कर रहा है। बढ़ती विद्युत मांग और बदलती तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप यहां निरंतर सुधार एवं आधुनिकीकरण कार्य किए जाते रहे हैं।

132 केवी पोलोग्राउंड (चंबल) सबस्टेशन मालवा क्षेत्र का दूसरा तथा मध्यप्रदेश का पांचवां सबसे पुराना एक्स्ट्रा हाई टेंशन सबस्टेशन है। प्रदेश का सबसे पुराना 132 केवी ज्योति नगर सबस्टेशन उज्जैन में नवंबर 1960 में प्रारंभ हुआ था। इसके बाद 132 केवी कटनी सबस्टेशन फरवरी 1965, 132 केवी मोतीझील सबस्टेशन मार्च 1965, 132 केवी सतना सबस्टेशन जून 1965 तथा 132 केवी पोलोग्राउंड (चंबल) सबस्टेशन 30 अगस्त 1966 को ऊर्जीकृत हुआ। 132 केवी पोलोग्राउंड (चंबल) सबस्टेशन में स्थापित किया गया पहला 10 एमवीए क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर जापान की हिताची कंपनी द्वारा निर्मित था। लगभग 25 टन वजनी यह ट्रांसफार्मर समुद्री मार्ग से तत्कालीन बम्बई (वर्तमान मुंबई) पहुंचा और वहां से सड़क मार्ग द्वारा इंदौर लाया गया। वर्ष 1962 में सबस्टेशन के निर्माण की स्वीकृति मिलने के बाद इसका ऑर्डर दिया गया था। इसी अवधि में मोरवा और इटारसी सबस्टेशन के लिए भी हिताची कंपनी से ट्रांसफार्मर मंगाए गए थे। 30 अगस्त 1966 को इसी ट्रांसफार्मर के माध्यम से इंदौर में अति उच्च दाब विद्युत आपूर्ति व्यवस्था का नया अध्याय प्रारंभ हुआ।

इस सबस्टेशन का नाम चंबल इसलिए रखा गया क्योंकि प्रारंभिक दौर में यहां विद्युत आपूर्ति चंबल नदी पर बने गांधी सागर बांध से लाई गई थी। उस समय उज्जैन, इंदौर और भोपाल में स्थापित 132 केवी सबस्टेशनों को भी चंबल नाम दिया गया था, क्योंकि इन क्षेत्रों को गांधी सागर परियोजना से उत्पादित विद्युत प्राप्त होती थी। एमपी ट्रांसको के प्रबंध संचालक श्री सुनील तिवारी ने कहा कि 60 वर्षों की यह उपलब्धि पूर्ववर्ती विद्युत मंडल और वर्तमान मे मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी के अभियंताओं, तकनीकी कर्मचारियों और पूर्व कार्मिकों के समर्पण का परिणाम है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों और निरंतर उन्नयन के माध्यम से यह सबस्टेशन भविष्य में भी इंदौर तथा मालवा क्षेत्र की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।

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